Thursday, May 14, 2020

Latest Moral stories in hindi For Student and Childrens

In this post, I have written two stories of  Akbar and Birbal which you should read and tell your kids.

 Moral stories in hindi
Stories for kids 

विश्वासघाती काजी 


फातिमा बीबी नाम की एक विधवा महिला ने अपने बाकी दिन गुजारने के विचार से  मक्का-मदीना जाने का निर्णय लिया। उसकी कोई संतान नहीं थी। हज पर जाने से पहले फातिमा बीबी ने अपने सारे गहने बेचकर सोने की मोहरें ले लीं। अपने खर्च के लिए कुछ मोहरें बाहर रखकर बाकी 800 मोहरें एक थैली में बंद कर उसके मुंह पर लाख की मोहर लगा दी। फिर वह अपने घर के ही पास में रहने वाले काजी के घर उस थैली को लेकर पहुंच गई। वह काजी अपनी ईमानदारी और रहमदिली के लिए ही मशहूर था।

फातिमा बीबी को अपने घर पर देखकर काजी बहुत खुश हुआ और उनसे पूछा, "कहिए मैं आपकी क्या सेवा कर सकता हुं?" फातिमा बीबी बोलीं, "काजी साहब, आप जैसा ईमानदार, शरीफ और सत्यवादी इस पूरे शहर में कोई नहीं है। मैं चाहती हूं कि मेरी यह थैली आप रख लें ताकि मैं निश्ंचित होकर हज करने के लिए मक्का-मदीना जा सक। इस थैली में 800 स्वर्ण मोहरे हैं । आअल्लाह के करम से यदि में सही-सलामत वापस आ गई तो मैं आपसे आकर इनको ले लूगी और यदि में अल्लाह को प्यारी हो गई तो इस थैली के मालिक आप होंगे, फिर आपका जो मन करे इनका कर लेना।'

फातिमा बीबी के इतना कहने पर काजी बोला, "बीबी साहिबा, आपका जो मन करे मेरे यहां निश्चित होकर रख सकती हैं। आपके लौटने तक मैं आपकी अमानत जान पर खेलकर भी सुरक्षित रखूंगा। आप आराम से हज करने के लिए जाइए।" काजी ने फातिमा बीबी को दिलासा देते हुए कहा तो वह मन-ही-मन काफी प्रसन्न हो गई। फातिमा बीबी भी कोई साधारण महिला नहीं थीं। थैली की प्रत्येक मोहर पर उसने एक छोटा-सा निशान बना दिया था, जो बहुत ध्यान से देखने पर ही नजर आ सकता था। फातिमा बीबी को जब मक्का-मदीना गए. पांच वर्ष हो गए तो काजी को यही लगा कि वह अब लौटकर नहीं आने वाली। वह निश्चित रूप से ही अल्लाह को प्यारी हो गई होगी। ऐसा सोचते ही काजी के मन में पाप जाग गया।

उसकी नियत खराब हो गई। उसने मन-ही-मन यह फैसला कर लिया कि वह 800 मोहरें अब किसी को भी नहीं देगा। फातिमा बीबी अगर आ भी गई तो उनको भी नहीं। एक रोज फातिमा बीबी अचानक ही मक्का-मदीना से लौट आईं और वह सीधे काजी के पास अपनी थैली मांगने के लिए चली गई। काजी ने उन्हें थैली वापस दे दी। घर पहुंचकर फातिमा बीबी ने थैली का मुंह खोला तो आश्चर्य से उनकी आंखें फटी की फटी रह गईं। थैली में सोने की मोहरों की जगह उतनी ही संख्या में पैसे और रांगे के टुकड़े थे। फातिमा बीबी का चेहरा बुझ गया। वह खुली थैली को लेकर काजी के घर पहुंचीं और कहा, "इसमें तो सोने की मोहरें नहीं हैं।" काजी तेवर बदलते हुए बोला , "एक तो नेकी करो ऊपर से बदनामी भी.. देखो बीबी साहिबा, मैंने तो केवल थैली रखी थी, उसमें सोने की मोहरें हैं या रांगे की यह तो मैंने देखा भी नहीं था। तुम जैसी थैली हे गई थीं, वैसी ही मैंने रख ली थी। जैसी मोहर लगी थैली तुमने दी थी, वैसी ही मोहर लगी थैली मैंने लौटाई भी है।देखिए, आप मुझे बदनाम न करें।" काजी की बातें सुनकर फातिमा वीबी को चक्कर से आ गए। वह गिड़गिडाते हुए बोलीं, "काजी साहब, मुझ पर रहम करो। मैं एक निःसंतान बुढ़ी विधवा हूँ। मेरे आगे-पीछे मुझे देखने वाला कोई नहीं है।

मुझ बेसहारा औरत पर रहम करो। के मोहरें ही मेरे बुढ़ापे का सहारा हैं । आप सारी मोहरें नहीं देना चाहते हैं तो आधी ही दे दीजिए। मैं तो आपको शहर का सबसे अधिक ईमानदार और रहमदिल इंसान समझकर अपनी थैली सौंप गई थी। आपने तो मुझ बेसहारा वृद्धा के साथ ऐसा विश्वासघात किया कि मैं कहीं की भी न रही।" काजी काफी नाराज हो गया और आगे बढ़ते हुए धमकी भरे स्वर में बोला , *"देखो बीबी, तुम यहां से चुपचाप इज्जत के साथ चली जाओ, नहीं तो धक्के मारकर बाहर कर दूंगा।" विधवा फातिमा बीबी आंसू बहाती हुई काजी के घर से बाहर आ गईं। अब उनकी समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें, क्या न करें, कहां जाएं और कहां न जाए? फिर अचानक ही उनकी आंखों के सामने अकबर बादशाह का दरबार नाच गया। वह बदहवास-सी सीधे बादशाह अकबर के दरबार की ओर बढ़ गई। दरबार डरी-सहमी वह दाखिल हुईं और अपनी सारी आपबीती कह सुनाई। बादशाह ने काजी को दरबार में बुलवाया और उससे पूछा, "इस वृद्धा औरत की थैली के विषय में तुम्हें मालूम है?"

काज़ी हाथ जोड़कर कांपते स्वर में बोला, "जहांपनाह, कोई पांच वर्ष पहले यह बुदढिया मेरे यहां एक थैली छोड़ गई थी। जब यह वापस आई तो मैंने सहर्ष इसकी मोहर लगी थैली इसे वापस दे दी। हुजूर, मुझे नहीं मालूम उस थैली में सोने की मोहरें थीं या रांगे के टुकड़े।" काजी ने बड़ी सफाई से जहांपनाह के सामने झूठ बोला। लेकिन शहंशाह अकबर को काजी की बातों पर श्वास नहीं हुआ। बादशाह काजी को घर जाने को कहा और फातिमा बीबी से कहा, "तुम शाही दरबार में हो। तुम्हें चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। तुम्हें पूरा न्याय मिलेगा। तुम्हारी मोहरें कुछ दिनों में ही तुम्हें मिल जाएंगी।" शहंशाह ने यह हुक्म देकर बीरबल को यह विवाद शहशाह सौंप दिया। यह विवाद बीरबल के हाथ में आते ही उन्होंने फातिमा बीबी से थैली ले ली और उस थैली को अपने घर ले गए। बीरबल ने वैसी ही कुछ थैलियां मंगवाकर उनमें कुछ-न-कुछ भरकर लाख की मोहरें लगवा दीं। फिर उनमें सुराख कर दिए। तत्पश्चात शहर के सभी रफगरों को एक-एक थैली दी और उनसे थैलियों के छेदों को रफ करवाया।

बीरबल ने सभी थैलियों को बड़ी बारीकी से देखा। एक थैली पर उनकी निगाह अटक गई। इसे बारीकी से देखने पर भी छेद का पता नहीं चल रहा था। बीरबल ने कहा, "इस थैली का रफू किस रफूगर ने किया है।" एक रफूगर चलकर बीरबल के पास आया और बोला, "हुजूर, क्या बात है, मैंने रफू किया है।" बीरबल उस रफूगर को लेकर एकांत में गए और डराते धमकाते हुए उससे पूछा, "बताओ, काजी की थैली रफ किसने की थी? तमने की थी न?" काजी की थैली उसने ही रफू की थी। बीरबल ने उससे पूछा, "सच-सच बोलना। तुमने यह थैली कब रफू की थी। बीरबल ने तल्ख स्वर में पूछा तो रफूगर कांपते स्वर में बोला, "हुजूर, कोई दो साल हुए होंगे, एक काजी ने मुझसे यह थैली रफ करवाई थी।" "क्या तुम्हें पता है उस थैली में क्या रखा हुआ था?" बीरबल ने रफूगर को घूरते हुए पूछा तो रफूगर सच को छिपा न सका और उसके मुंह से निकल गया, “हुजूर उस में कुछ तांबे के पैसे और रांगे के टुकड़े थे।" "काजी ने इस काम के लिए क्या तुम्हें कुछ दिया था?" बीरबल की कड़क आवाज के आगे रफगर बिल्कुल ही ढीला पड़ गया। वह थमती आवाज में बोला, "दो मोहरें मिली थीं, मालिका" "क्या वे मुहरें तुम्हारे पास अभी भी हैं। देखो, सच का साथ दोगे तो मैं तुम कहते ही रफूगर बड़ी मुश्किल से बोला, "हजूर झूठ नहीं बोलूंगा। एक मुहर तो खर्च हो गई है। हां, एक मुहर मेरे पास है।" की कोशिश की तो शाही कहर से तुम्हें मैं भी नहीं बचा सकता।"

बीरबल के इतना कहते ही रफूगर भागा-भागा मोहर लाने चला गया। बीरबल ने फातिमा बीबी और काजी को भी बुलवा लिया। रफूगर थोड़ी देर के बाद मोहर लेकर बीरबल के पास आया तो काजी उसको देखते ही डर गया। बीरबल ने रफूगर से मोहर लेकर फातिमा बीबी के हाथ में रख दी और कहा, "तुमने अपनी मोहरों पर निशानी लगाई थी ना दिखाओ वह निशानी कहां है।" फातिमा बीबी ने पलक झपकते ही अपना लगाया निशान बीरबल को दिखा दिया। अब बीरबल ने रफूगर की ओर थैली करके कहा, "बोलो रफूगर, यह वही थैली है न?" "हां हुजूर, यह वही थैली है।" रफूगर रुक-रुककर बोला। "हां तो...." बीरबल तल्ख आवाज में बोले, "तुमने कहां पर रफू किया था, बोलो?" रफ़गर थैली र हाथ घरते हुए बोला, "यहां पर हुजूर। मेरा काम साफ नजर आता है।" काजी के तो पसीने छूटने लगे।

उसके पास ऐसा कोई जवाब ही नहीं था कि वह अपने बचाव में कुछ कह सके। बीरबल गरजकर बोले, "इस काजी को जंजीरों में बांधकर जेल में डाल दिया जाए।" इसके बाद काजी के घर की तलाशी ली गई और फातिमा बीबी की मोहरें उसके घर से बरामद हुई। फातिमा बीबी ने अपना निशान सभी मोहरों पर दिखा दिया। बीरबल ने उन सारी मुहरों को उसे दे दिया। रफगर को ईनाम देकर जाने दिया गया। बादशाह सलामत बीरबल के र फैसले से बहुत खुश हुए।

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घर कैसे लुटा 



शहंशाह अकबर एक रोज दरबार में आए तो वह सबको बहुत ही गमगीन मुद्रा में दिखे । दरबारियों ने उनसे इसका कारण पूछा तो उन्होंने कहा , " अब यह बेचैनी और उदासी तो बीरबल ही दूर कर सकते हैं । " इसी बीच बीरबल दरबार में आ गए । जहांपनाह ने बीरबल को गौर से देखा और कहा , " बीरबल , शायद तुम मेरी समस्या सुलझा सको । इस प्रश्न में पूरे राज्य की समस्या छुपी हुई है । बताओ , घर कैसे लुटा और बैल कैसे घायल हुआ ? " बीरबल के लिए कोई भी सवाल कठिन नहीं होता था ।

वह शीश नवाकर बड़े अदब से बोले " जहांपनाह , जुआ नहीं हटा था । " " तम कहना क्या चाहते हो , बीरबल , साफ - साफ बताओ । " अकबर ने कहा । " जहांपनाह , जुआ खेलना नहीं रोका गया तो घर लुट गया और बैल की गरदन से जुआ नहीं हटाया गया तो बैल घायल हो गया । " बीरबल ने स्पष्ट शब्दों में जवाब दिया । शहंशाह अकबर बहुत ही खुश हुए और उसी समय उन्होंने घोषणा कर दी कि हमारे राज्य में कोई भी जुआ नहीं खेलेगा , जो जुआ खेलते पकड़ा जाएगा उसे दंडित किया जाएगा । इससे पूरे राज्य में अमन चैन स्थापित करने में बादशाह को काफी सहायता मिली ।

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