Wednesday, April 1, 2020

Top 4 hindi short stories for students with moral

Today we have Top 4 hindi short stories for students with moral.You should read this story.


Top 4 hindi short stories for students with moral
Top 4 hindi short stories for students with moral 


अपनी दाढ़ी की आग बुझाऊंगा |  Hindi short stories

बादशाह अकबर के दिमाग में तरह-तरह की बातें आती रहती थीं। दरबार में वह बैठे हुए थे और वरबारियों से बातें करने में मशगूल थे। तभी अचानक उन्होंने दरबारियों से सवाल कर दिया, "खुदा न करे अगर सबकी दाढ़ी में आग लग जाए और उसमें मैं भी शामिल होऊं तो आप सब सबसे पहले किसकी दाढ़ी की आग बुझाना चाहेंगे?" दरबारियों में कुछ पल के लिए सन्नाटा छा गया, फिर अधिकांश दरबारियों ने समवेत स्वर में कहा, "जहांपनाह की दाढ़ी की।" शहंशाह को दरबारियों की बात पर यकीन नहीं हुआ। उन्होंने बीरबल की ओर देखा। वह खामोश बेठे हुए थे।

शहंशाह ने बीरबल से पूछा, "बताओ बीरवल, किसकी दाढ़ी की आग पहले बुझाओगे?" बीरवल बोले, "जहांपनाह, सच्चाई तो यही है कि मैं पहले अपनी दाढ़ी की आग बुझाऊंगा, फिर दूसरे की दाढ़ी के बारे में सोचुंगा।" बीरबल ने आत्मविश्वास से कहा। बादशाह अकबर ने बीरवल को गर्व से देखा और कहा, "बीरबल तुम एक हाजिरजवाब ही नहीं, बल्कि एक सच्चे व्यक्ति भी हो। बाकी लोग मुटझे खुश करने के लिए झूठ बोल गहे थे. जबकि हर व्यक्ति पहले अपने बारे में ही सोचता है। हम तुम्हारे इस जवाब से बहुत खुश है, बीरबल।" यह कहकर शहंशाह चुप हो गए। वह बीरवल की स्पष्टवादिता मे बहुत ही खुश थे।



नदी पति के घर जा रही है | Stories for students


वर्षा ऋ्तु थी। यमुना नदी में बाढ़ आई थी। लहरें किनारे पर आकर टकरा रही थीं, जिससे अजीब सी 'छप-छप' की आवाज होती थी। शहंशाह अकबर का महल यमुना तट पर ही था। बादशाह गहरी नींद में सोए हुए थे। रात का सन्नाटा चारों तरफ फैला पड़ा था। छप-छप की आवाज जब बादशाह के कानों में पड़ी तो वह जाग गए और छप-छप की आवाज सुनने लगे। फिर इसके बाद बादशाह को नींद नहीं आई तो वह कमरे में ही उठकर टहलने लगे। टहलते-टहलते वह खिड़की के पास आ गए और पानी से लबालब भरी यमुना नदी को अपलक देखने लगे। लहरों की छप-छपाहट अभी भी उनके कानों में गूंज रही थी। तभी उन्हें ऐसा जान पड़ा जैसे नदी रो रही हो।

शहंशाह के मन में सवाल उठ खड़ा हुआ कि आखिर क्या बात है। रात के सन्नाटे में सब सो रहे हैं मगर नदी क्यों रो रही है? अपने इस प्रश्न का जवाब वह नहीं ढूंढ़ सके तो बिस्तर पर आकर चुपचाप लेट गए। दूसरे दिन शहंशाह दरबार में आए तो सभी दरबारियों से यही प्रश्न किया कि नदी रोती क्यों है? बारी-बारी से सभी दरबारियों ने अपनी समझ के अनुसार जवाब दिया लेकिन किसी के भी जवाब से बादशाह को संतुष्टि नहीं मिली। इसी बीच बीरबल दरबार में पधारे।" बादशाह ने बीरबल को देखते ही सवाल कर दिया, "बताओ बीरबल, नदी क्यों रोती है?"

बीरबल इस बेतुके सवाल पर कुछ देर तक हतप्रभ खड़े रहे फिर उन्होंने कहा, "जहांपनाह, मैं आपके सवाल का जवाब तभी दे सकता हूं जब मैं नदी का रोना अपने कानों से सुनूंगा।' "बीरबल, नदी के रोने की आवाज तो मैं तुम्हें रात के सन्नाटे में ही सुना सकता हूँ।" बादशाह ने यह कहकर बीरबल को देखा। बीरबल रात होने पर शहंशाह के महल में पहुंचे। बादशाह उन्हें अपने महल की खिड़की के पास ले गए और वह छप-छप' की आवाज उन्हें सुनाई और इसका कारण पूछा। बीरबल अगले पल ही यह समझ गए कि यह तो पानी के बहने की आवाज है और वादशाह ने इसे ही नदी का रोना मान लिया है। बीरबल झुककर बड़े ही विनम्र स्वर में बोले, "हुजूर, नदी अपने पिता के घर यान पहाड़ से विदा होकर अपने पति यानी समुद्र के यहां जा रही है, जिससे वह पिता से अलग होने के गम में रोती जा रही है।' बीरबल का जवाब इतना सटीक और हकीकत भरा था कि बादशाह अकबर खुशी के मारे गद्गद हो गए और कहा, "बीरबल, तुम्हारे पास तो हर सवाल का जवाब होता है। हम तुम्हारे जवाब से संतुष्ट हुए।"



बादशाह के अनमोल सवाल | Stories for students with moral 

आज दरबार समय से पहले ही लग गया था। बादशाह अकबर समय से पहले ही दरबार में आकर बैठ गए थे। शहंशाह अकबर की यह खासियत थी, जब वह फुर्सत में होते थे, तब तरह-तरह के विचार उनके मन में उत्पन्न हो जाया करते थे और फिर वह दरबारियों से उनका समाधान पूछते थे। बीरबल आज दरबार में नहीं थे। शहंशाह ने दरबारियों से पूछा, "दूध किसका अच्छा, फूल किसका अच्छा, पत्ता किसका अच्छा, राजा कौन अच्छा और मिठाई किसकी अच्छी?"

शहंशाह के सवाल सुनते ही दरबारी आपस में फुसफुसाने लगे। किसी दरबारी ने गाय के दूध को अच्छा बताया तो किसी दरबारी ने भैंस का और किसी ने बकरी का दूध अच्छा बताया। इसी तरह से किसी दरबारी ने गुलाब का फूल अच्छा बताया तो किसी दरबारी ने कमल का। किसी दरबारी ने केले के पत्ते को अच्छा बताया तो किसी दरबारी ने नीम के पत्ते को अच्छा बताया। किसी दरबारी ने राजा कौन अच्छा के  जवाब में शहंशाह को अच्छा बताया और अंतिम सवाल के जवाब में किसी दरबारी ने गन्ना को अच्छा बताया तो किसी दरबारी ने अंगुर को और किसी दरबारी ने मिष्ठान को अच्छा बताया, लेकिन बादशाह अकबर उनके जवाब संतुष्ट नहीं हुए।

तभी दरबार में बीरबल आ गए। बादशाह के चेहरे पर उनको देखते ही चमक आ गई और बीरबल के बैठने से पहले ही शहंशाह ने उपरोक्त पांचों सवालों के जवाब पूछे। बीरबल कुछ पल तक शांत रहे, फिर बोले, "जहांपनाह, मां का दूध सबसे अच्छा और हितकारी होता है। कपास का फल सबसे अच्छा होता है, क्योंकि इससे सबके शरीर ढक जाते हैं। पान का पत्ता सबसे अच्छा होता है, क्योंकि इसे खाकर दुश्मन भी दोस्त बन जाते हैं। राजाओं में इन्द्र सबसे अच्छे हैं , क्योंकि उनके आदेश से बारिश होती है और वारिश से धन-धान्य में वृद्धि होती है और पूरे प्राणियों की क्षुधा तृप्त होती है। मिठास वाणी की सबसे अच्छी होती है, क्योंकि जिसकी वाणी में मिठास होती है, वह सारे जगत को अपने वश में कर लेता है।" शहंशाह ने सिंहासन से उठकर बीरबल को गले से लगा लिया और कहा, "बीरबल, तुमने अपने जवाब से मुझे तृप्त कर दिया।




नीचे की मंजिल | Hindi short stories for students


बादशाह अकबर को आकर एक दरबारी ने बताया कि बीरबल अपनी बांदियों और दासियों का ध्यान जरूरत से अधिक रखते हैं, जब देखो उनकी बड़ाई करते रहते हैं। दरबारी की इस बत को सुनकर शहंशाह के मन में विचार आया कि क्यों न हम चलकर स्वयं इस बात की तहकीकात करें कि आखिर मामला क्या है? इसके दूसरे दिन बादशाह अकबर अचानक ही बीरबल के घर पहुंच गए और सीढ़ियां चढ़ते हुए ऊपरी मंजिल पर पहुंच गए।

बादशाह सलामत को सहसा बीरबल के यहां देखकर एक दासी दौड़ी-दौड़ी आई। बादशाह सलामत दासी को देखकर हल्का-सा मुस्कराए, फिर बोले, "तुम्हारी ऊपर की मंजिल तो बहुत सजी हुई है, सुन्दर और हसीन भी है लेकिन जरा नीचे की भी तो देखें कैसी है?" दासी बीरबल का नमक खाती थी। बीरबल के नमक का कुछ तो असर उस पर था ही। वह अगले पल ही मुस्कराकर बोली, "अवश्य देखें, हजूर! आप उसी रास्ते से तो होते हुए आए हैं, फिर भी आपको मालूम नहीं हुआ कि नीचे की मंजिल कैसी है?'

सवाल के बदले सवाल, शहंशाह भोंचक्के रह गए। दासी का तीखा, पर सटीक जवाब शहंशाह ने सुना तो उन्हें यह समझने में देर न लगी कि बीरबल की दासियां सचमुच ही तारीफ के काबिल हैं। बीरबल यूंही उनकी तारीफ करते नहीं फिरते है। शहंशाह चुपचाप महल को लौट गए।


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