Saturday, February 29, 2020

Top 3 Story in hindi For Kids

Today we have written Top 3 Story in Hindi For Kids. These stories are for kids which gives moral to kids.

 Story in Hindi For Kids

बुजुर्गो से मिला ज्ञान | Story in hindi 


बादशाह अकबर के मन में हमेशा कोई न कोई सवाल उठता ही रहता था। एक दिन बादशाह सलामत ने बीरबल से कहा, "बीरबल, दरबार में एक ऐसे आदमी को ढूंढ़ कर ले आओ, जो बहुत ही बुद्धिमान हो।" बीरबल कुछ देर शांत रहे, फिर बोले, "जहांपनाह, मैं जल्दी ही ऐसा आदमी ढूंढ़कर दरबार में ले आऊगा। लेकिन इसके लिए समय और धन की आवश्यकता पड़ेगी।' बादशाह अकबर बोले, बीरबल, सोने की 300 मोहरें और एक हफ्ते का समय हम तुम्हें देते हैं। धन आर एक हफ्ते का अवकाश लेकर बीरबल अपने घर चले गए। सारा धन उन्होंने दीन-दुखियो में बाट दिया। सप्ताह के अंतिम दिन ब्रीरबल ने एक चरवाहे को पकड़ा और उस स्नान करवाकर अच्छे कंपड़े पहनाएं तथा सन का सौ माहर उसे दकर दरबार में ले आए। रास्त में ही चरवाहे को बता दिया कि उसे बादशाह सलामत के सामने कैसा व्यवहार करना है। बादशाह अकबर के दरबार में पधारते ही बीरबल ने कहा, "जहांपनाह, मैं बुद्धिपानों का बुद्धिमान व्यक्ति दूढकर लाया हूँ। शहंशाह ने चरवाहे को देखते हुए पूछा, "तुम्हारे माता-पिता तुम्हें क्या कहकर बुलाते हैं? तुम कहां के रहने वाले हो। तुम कौन-सी खास बात जानते हो?" एक साथ इतने सवाल बादशाह अकबर ने कर दिए। लेकिन चरवाहे ने किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया, क्योंकि बीरबल ने उसे पहले से ही चुप रहने के लिए कहा था। बादशाह ने शिकायत भरे लहजे में बीरबल से कहा, "बीरबल, यह कहीं गूंगा और बहरा तो नहीं है? इसने तो हमारे किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया। भला यह बुद्धिमानों का बुद्धिमान कैसे हो सकता है?" बीरबल ने शीश नवा कर कहा, "हुजूर, यह इसकी बुद्धिमानी है। इसने अपने बड़े-बूढ़ों से सीख रखा है कि राजा और स्वयं से अधिक समझदार व्यक्ति के सामने चुप रहने में ही भलाई है। यह उनसे मिले ज्ञान का अनुसरण कर रहा है।" बादशाह अकबर बीरबल के इस तर्क के आगे अब क्या बोलते। वे मुस्कराकर ही रह गए और चरवाहे को इनाम देकर सम्मान के साथ दरबार से विदा किया।




दुष्ट के साथ दुष्टता | Story in hindi 


एक धनवान कंजूस व्यक्ति की तारीफ में एक कवि कविता लिखकर उससे मिला और कवि ने अपनी कविता बड़ी शान से पढ़कर उसे सुनाई। वह कंजूस समझ गया कि यह कवि उससे कुछ लेने के लिए ही यहां आया है। प्रशंसा में कविता पढ़ना तो एक बहाना है। कंजूस ने सोचा कि क्यों न मैं भी इसे अपनी बातों से खुश करके यहां से जाने पर मजबूर कर दें। यह सोचते हुए वह कंजूस बोला , "बहुत खूब कवि महोदय, आपने मेरी तारीफ में बहुत अच्छी कविता लिखी है। कल आप आइए, मैं आपकी मुराद अवश्य पूरी करूंगा।" कवि वापस चला गया। कंजूस बहुत ही खुश हुआ कि चलो बला टली। कुछ देना न पड़ा और बात भी बन गई। दूसरे दिन कवि कुछ धन पाने के लालच में कंजूस से मिलने आया। कवि पर नजर पड़ते ही कंजूस बोला, "तुम कौन हो, भाई? किससे मिलना है?" यह कहकर कंजूस ने ऐसा नाटक किया जैसे उसने कवि को कभी देखा ही न हो। कवि आश्चर्य से चौंकते हुए बोला, "महोदय, आप यह क्या कह रहे हैं। कल ही तो मैं आपसे मिला था और आपकी तारीफ में खूबसूरत-सी कविता भी लिखकर सुनाई थी। आप इतने कम समय में ही मुझे भूल गए?" कंजूस बोला, "कल की बात आज करने से कोई लाभ नहीं। जैसे कल तुमने मुझे कविता सुनाई वैसे ही मैंने भी अपनी मीठी-मीठी बातें तुम्हें सुना दी थीं। न तो तुमने मुझे कुछ दिया और न मैंने तुम्हें कुछ दिया। हिसाब बराबर हो गया। अब तुम मेरा पीछा छोड़ो। कंजूस के इतना कहने पर वह कवि वहां से सीधे घर आया और अपने एक दोस्त के साथ बीरबल से मिला और अब तक जो हुआ था, वह सब बीरबल को बता दिया। बीरबल बोले, "कवि महोदय, आप एक हफ्ते के बाद अपने इस दोस्त को उस कंजूस के यहां भेजना। जब आपका दोस्त कामकाज के बहाने उससे मित्रता कर ले तब किसी दिन उसे घर पर आने का निमंत्रण देना। उस दिन मुझे भी बुला लेना लेकिन इतना अवश्य ध्यान रहे कि उसे केवल न्योता देना है, खाना नहीं खिलाना है।" बीरबल यह कहकर दरबार के कामकाज में तल्लीन हो गए। कवि का मित्र कुछ ही रोज में कंजूस से काफी घुल-मिल गया। जब मित्रता गाढ़ी हो गई तब एक दिन कंजूस को उस व्यक्ति ने खाने का निमंत्रण दिया। कंजूस ने निमंत्रण स्वीकार कर लिया। बीरबल और कवि  को भी इसकी खबर कर दी। कवि वेश बवलकर दोस्त के घर आ पहुंचे। बीरबल भी वेश बदलकर आ गए। थोड़ी देर बाद कंजूस भी आ गया। उन तीनों ने ही कंजूस की बड़ी आवभगत की और कंजूस से तरह-तरह की मीठी बातें करने लगे। कंजूस भूखा था, क्योंकि वह घर से खाकर नहीं चला था और दावत के नाम पर सुबह से ही कुछ खाया नहीं था। जब उसे भूख कुछ अधिक ही सताने लगी तो परेशान होकर कंजूस बोला , "अरे भाई, खाने पीने का भी इंतजाम है या ऐसे ही बैठे रहना है?" कवि के मित्र ने कहा, "मित्र, मैंने तुम्हें भोजन के लिए नहीं बुलाया है। मैंने तो तुम्हें केवल भोजन का निमंत्रण देकर प्रसन्न किया है।" यह सुनते ही कंजूस ने उन तीनों को ध्यान से देखा, फिर कवि को तुरंत ही पहचान लिया। कंजूस ने अपनी गलती के लिए क्षमा मांगी और कवि को वाजिब इनाम दिया तथा इस घटना से अच्छी सीख ली।




एक कागज ऊँची चारपाई | Story in hindi 



बीरबल महीनों से बीमार थे दरबार में वह नहीं आ रहे थे। शहंशाह अकबर से जब बीरबल को देखे बिना नहीं रहा गया तो वह दो सैनिकों के साथ उनके घर पर पहुंच गए। अकबर को अपने घर पर देखकर बीरबल का बीमार चेहरा खिल गया अकबर ने उनसे उनके स्वास्थ्य के बारे में जैसे ही पूछा बीरबल उठकर शौचालय की ओर दौड़ पड़े। बीरबल के जाते ही अकबर के मन में विचार आया कि क्यों न बीरबल के बुद्धि बल की परीक्षा ली जाए। देखें बीमारी की हालत में बीरबल का दिमाग उतना ही चलता है या कुछ बदलाव आ गया है। यह विचार आते ही शहंशाह ने अपने सैनिकों से कहा- 'बीरबल की चारपाई के चारों पायों के नीचे कागज के चार टुकड़े रख दो। सैनिकों ने अगले पल ही शहंशाह के हुक्म का पालन किया और कुछ दूरी पर जाकर चुपचाप खड़े हो गए। इतने में बीरबल शौचालय से आ गए और चारपाई पर लेट गए। लेकिन वह अगले पल ही सिर उठाकर चारपाई के चारों तरफ देखने लगे। बादशाह अकबर ने उनको अपनी बातों में उलझाकर रखने की बहुत कोशिश की। लेकिन बीरबल का ध्यान इधर-उधर भटक ही जाता। बादशाह ने बीरवल के मन की चंचलता को देखकर पूछ ही लिया, "क्या बात है बीरबल, तुम्हारा ध्यान हमारी बातों में नहीं लग रहा है?" बीरबल बोले, "हुजूर, मुझे जाने क्यों ऐसा जान पड़ता है जैसे कमरे में कुछ बदलाव किया गया है ।" "यह केवल तुम्हारा भ्रम है, बीरबल। कमरे में कहीं कोई बदलाव नहीं हुआ है। जैसा पहले था वैसा ही अभी भी है।" बादशाह यह कहकर शांत हो गए। "नहीं जहांपनाह! या तो मेरे घर की दीवारें कागजभर जमीन के नीचे चली गई हैं या मेरी चारपाई एक कागज की मोटाई जितनी ऊंची हो गई है।" बीरबल की बातें सुनकर शहंशाह अकबर बोले, "बीरबल, तुम बीमार हो और ऐसे में दिमाग में कुछ न कुछ ऊल जलूल विचार आ ही जाते हैं।' शहंशाह ने बीरबल को भ्रमित करना चाहा लेकिन चतुर बीरबल सब समझ गए और बोले, "हुजूर , यह मेरे मन का भ्रम नहीं है। मैं बीमार हूं लेकिन मेरी बुद्धि बीमार नहीं है।" शहंशाह बीरबल को दिमागी रूप से स्वस्थ देखकर बहुत ही खुश हुए और बोले, "बीरबल, हम तुम्हारी बीमारी को लेकर बहुत ही चिंतित थे। लेकिन तुम्हें और तुम्हारी बुद्धि को देखकर अब मेरी चिंता दूर हो गई' फिर बादशाह ने हंसते-हंसते यह बता दिया कि हां, तुम्हारी चारपाई एक कागज ऊंची हो गई है, क्योंकि तुम्हारी बुद्धि को जांचने के लिए हमने पायों के नीचे कागज के टुकड़े रखवा दिए हैं। यह कहकर शहंशाह ने उनके जल्दी स्वस्थ होने की ईश्वर से प्रार्थना की फिर अपने महल को लौट गए।





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