Saturday, February 15, 2020

5 Hindi Short Stories With Moral For Kids

Today we have written 5 Hindi Short Stories With Moral For Kids. These stories are for kids which gives moral to kids.

Akbar Birbal Hindi Stories For Kids
Akbar Birbal Hindi Stories For Kids

न कम न अधिक | Hindi Short Stories With Moral For Kids


अपनी छोटी बेटी के बहुत जिद करने पर एक दिन बीरबल उसे दरबार में लेकर आए। उनकी बेटी भी उनकी तरह ही हाजिरजवाब और वाचाल थी। अकबर बादशाह को जब मालूम हुआ कि वह लड़को बीरबल की है तो उन्होंने प्यार से उसे अपने पास बुलाया और उससे बात करने लगे। लड़की शहंशाह से बहुत शीघ्र ही हिल -मिल गई। तभी अचानक ही बादशाह ने कहा, "हमारी बेटी को बात करना भी आता है?" 

जवाब में बीरबल की बेटी बोली, "न कम न अधिका' बादशाह लड़की का मुंह ताकने लगे। उन्हें उसकी बात समझ में नहीं आई थी। वह बोले, "तुम कहना क्या चाहती हो?" बीरबल की बेटी ने कहा,"मैं यह कहना चाहती हूं कि बड़ों से कम बोलना चाहिए और छोटों से ज्यादा। बादशाह सलामत लड़की की बुद्धिमत्तापूर्ण बात सुनकर खुशी के मारे गदगद हो गए।


मूर्खो की गिनती | Hindi Short Stories With Moral For Kids

घोड़ों का एक व्यापारी कुछ घोड़ों को लेकर अरब देश से आया और शहंशाह अकबर से मिला। बादशाह को घोड़े पसंद आ गए और उन्होंने सारे घोड़े खरीद लिए और सौदागर से कहा, "तुम हमारे लिए और अरबी घोड़े लाओ। तुम अरब से आए हो, इसलिए पेशगी के तौर पर हम तुम्हें हजार रुपये दे रहे हैं।"  सौदागर बहुत ही प्रसन्न हुआ और वापस अरब लौट गया।

सौदागर के चले जाने के बाद बीरबल को मालूम हुआ कि वह व्यापारी पेशगी लेकर अपने देश चला गया और बादशाह ने उसका नाम-पता भी नहीं पूछा। उन्हीं दिनों शहंशाह अकबर बीरबल से बोले, "बीरबल, हमारे राज्य में वैसे तो मूर्ख बहुत ही कम हैं, फिर भी जो मूर्ख हैं, उनके नाम हम जानना चाहते हैं। इस राज्य में कितने मुर्ख हैं, उनकी गिनती करने का काम हम तुम्हें सौंपते हैं, बीरबल।" "आपका हुक्म सिर आखों पर, हुजूर।" बीरवल इतना कहकर मूर्खो की गिनती करने के लिए निकल गए। दो दिन के बाद बीरबल दरबार में आए और मूर्खों की एक सूची बादशाह को दी। उस सूची में बादशाह सबसे ऊपर अपना नाम देखकर भड़क उठे और बीरवल से इसका कारण पूछा। बीरबल सिर झुकाकर बोले, "जहांपनाह, अरब देश से जो व्यापारी आया था, आपने उसका नाम-पता पूछे बिना ही उसे हजार रुपये पेशगी में दे दिए। यदि वह व्यापारी घोड़े नहीं लाया तो आप उसका क्या बिगाड़ लेंगे?

आप तो उसका नाम-पता नहीं जानते। क्या यह मूर्खता भरा काम नहीं है?' शहंशाह अकबर को बीरबल की बात बहुत पसंद आई। वह अपनी गलती पर मन-ही-मन पछताने लगे लेकिन वह थे तो एक शहंशाह। अकड़ते हुए बोले, "यदि वह व्यापारी घोड़े लेकर आ गया तब....?" बीरबल ने जवाब में कहा, "जहांपनाह, फिर मैं आपके नाम के स्थान पर उस व्यापारी का नाम लिख दूंगा।' शहंशाह अकबर यह सुनकर अचानक ही हंस पड़े। हाजिर जवाब बीरबल भला गलत कसे हो सकते थे।

बुद्धिमानो के बुद्धिमान | Hindi Short Stories With Moral For Kids

बादशाह अकबर अक्सर ही बीरबल की परीक्षा लेते रहते थे और बीरबल हमेशा ही पास हो जाया करते थे। एक बार शहंशाह ने बीरबल को एक बकरी देते हुए कहा, "बीरबल, इस बकरी को जितना खाना दिया जाता है, उससे दोगुना खाना तुम्हें देना है। लेकिन बकरी का वजन बढ़ना नहीं चाहिए। मैं एक हफ्ते के बाद स्वयं इसका वजन करूंगा।"

बीरबल अब करते क्या? बादशाह का हुक्म तो हुक्म होता है। बीरबल ने उस बकरी को दोगुना खाना देना शुरू कर दिया।' वजन बढ़ने नहीं देना था , इसलिए हर रात वह एक कसाई को छुरी देकर बकरी के सामने बैठाने लगे।- बकरी दिनभर खुब खाती और जब रात को हाथ में छुरी लिए कसाई को देखती तो उसकी हालत बहुत ही खराब हो जाती। न तो वह बैठ पाती और न ही सो पाती। दोगुना खाना खाने के बाद भी उसका वजन नहीं बढ़ा। एक हफ्ते बाद शहंशाह अकबर के सामने दरबार में बकरी को तोला गया। बकरी का वजन जरा-सा भी नहीं बढ़ा था। जितना पहले था, उतना ही था। शहंशाह अकबर को बहुत ही आश्चर्य हुआ। उन्होंने बीरबल से कहा,

"बीरबल, यह कैसे संभव हुआ, बकरी तो रोज दोगुना खाना खाती है। वजन तो बढ़ना चाहिए।" बीरबल बोले, "हुजूर, बकरी का वजन आखिर बढ़ता तो कैसे? हाथ में छुरी लिए एक कसाई रातभर उसके सामने बैठा जो रहता था। जो वह दिन में खाती थी, रात में कसाई की छरी देखकर सब बराबर हो जाता था। "बहुत खूब, बीरबल। तुम्हारी इसी चतुराई के तो हम कायल हैं। तुम बुद्धिमानों के बुद्धिमान हो, बीरबल।" बादशाह यह कहते-कहते हंस पड़े।

सूरत से बड़ी सीरत | Hindi Short Stories With Moral For Kids


बादशाह अकबर दरबार में आए तो उन्हें बीरबल कहीं नजर नहीं आए । बादशाह बड़ी बेताबी से उनका इंतजार कर रहे थे, तभी बीरबल दरबार में हाजिर हुए। अकबर बादशाह ने बीरबल को देखते ही सवाल कर दिया, "बीरबल, हमारी इच्छा है कि हम पिशाचिनी और अप्सरा को एकसाथ देखें।" बीरबल यह सुनकर थोड़ी देर तक चुप रहे, फिर बोले, "ठीक है, हज़र।" यह कहकर बीरबल दरबार से बाहर आ गए और पूरे दिन वह इसी पर सोचते-विचारते रहे। शाम के समय बीरबल एक वेश्या से मिले और उसे समझा-बुझाकर अगले दिन दरबार में हाजिर होने के लिए तैयार किया।

दूसरी सुबह दरबार लगा तो वह वेश्या बीरबल से आकर मिली। बीरबल अपनी पत्नी और वेश्या को लेकर दरबार में हाजिर हुए। बीरबल ने अपनी पत्नी का परिचय कराते हुए शहंशाह से कहा, "हुजूर! यह अप्सरा है । मेरा जीवन और मेरा घर इसी के कारण स्वर्ग बना हुआ है।" शहंशाह बीरबल की बातों से असंतुष्ट होते हुए कहा, "मैं नहीं मानता। अप्सरा तो खूबसूरत होती है, तुम्हारी स्त्री तो साधारण सी है और दुबली-पतली- भी है। भला यह अप्सरा कैसे हो सकती है?" बीरबल बोले, "जहांपनाह, खूबसूरती सीरत और चरित्र की महत्वपूर्ण होती है , रूप की नहीं। इस स्त्री से मुझे स्वार्गिक सुख मिलता है, इसलिए यह अप्सरा है।" यह कहने के बाद बीरबल ने वेश्या की ओर इशारा किया। उस पर नजर पड़ते ही बादशाह सहसा ही बोल पड़े, "वाह! क्या सुंदाप्ता है ।"

बीरबल बोले, "जहांपनाह, यह एक वेश्या है, यह महाठागिनी है और गले का फंदा है। यही है पिशाचिनी, जिसको एक बार पकड़ लेती है, उसका सबकुछ बर्बाद करके ही उसका पीछा छोड़ती है, हुजूर।" बादशाह ने जब बीरबल के मुख से दोनों औरतों के गुणों को सुना तो उनको पिशाचिनी और अप्सरा का अंतर समझ में आ गया।

नाई गया स्वर्ग में | Hindi Short Stories With Moral For Kids

बीरबल बहुत ही बुद्धिमान और हाजिरजवाब थे, जिससे उन्हें ज्यादातर लोग पसंद करते थे और इसके साथ ही कुछ लोग बीरबल की हाजिरजवाबी के कारण उनसे जलते भी थे। बीरबल से जलने वालों ने एक दिन बीरबल को हमेशा के लिए रास्ते से हटाने का निर्णय लिया। अकबर बादशाह का जो हज्जाम था, इस काम के लिए बीरबल के दुश्मनों ने उससे सहायता मांगी। हज्जाम पहले तो तैयार नहीं हुआ लेकिन जब उन्होंने उसे हीरो-मोतियों से लाद देने का लालच दिया तो वह हज्जाम डरते-डरते ही सही, पर तैयार हो गया। अगली सुबह हज्जाम महल में बादशाह अकबर की हजामत बनाने पहुंचा।

बादशाह सलामत चुपचाप हजामत बनवाने लगे। हज्जाम बाल काटते हुए बोला, "जहांपनाह, मैं. यह कहते-कहते हज्जाम चुप हो गया। बादशाह बोले. "बोलते-बोलते रुक क्यों गए? जो कहना है बेहिचक कहो।" "हुजूर, आप तो अपने स्वर्गवासी पुरखों के विषय में कभी सोचते विचारते ही नहीं । " हज्जाम इतना बोलकर चुप हो गया। बादशाह की रुचि हज्जाम की बातों में बढ़ गई। वह बोले, "मैं उनके लिए लाख सोचने के बाद भी कुछ नहीं कर सकता, वे तो अब जिंदा ही नहीं हैं।" हज्जाम की अब हिम्मत बढ़ गई। वह बो ना, "जहांपनाह, आपके पुरखे स्वर्ग में ही तो हैं। वहां किसी को भेजकर यह तो जाना ही जा सकता है कि वे किस हाल में हैं।" 'क्या ऐसा हो सकता है?'

बादशाह के चेहरे पर खुशी पसर गई। उन्हें हजाम की सलाह काफी पसंद आई । वे बोले, "'लेकिन किसी को स्वर्ग में कैसे भेजा जा सकता है?" हज्जाम मन-ही-मन खुश होते हुए बोला, "यह तो बहुत ही आसान काम है हुजूर। किसी खुले स्थान में चिता सजाकर उसमें किसी बुद्धिमान व्यक्ति को बैठा दिया जाए तो वह चिता की लपटों के साथ सीधे स्वर्ग में पहुंच जाएगा।" हजाम की यह योजना बादशाह को भी पसंद आई। लेकिन उन्होंने अगले पल ही सवाल कर दिया, 'योजना तो ठीक है। पर इस तरह से जलने को कौन तैयार होगा? "  हज्जाम ने सुझाव दिया, "जहांपनाह, बीरबल राज्य के सबसे चतुर व बुद्धिमान व्यक्ति हैं । इस कार्य के लिए उनसे अधिक योग्य दूसरा कोई व्यक्ति नहीं हो संकता।"

अकबर बादशाह यह सुनकर गंभीर हो गए, क्योंकि वह समझ गए थे कि बीरबल को जान से मारने के लिए चाल चली जा रही है , फिर भी वह अनाड़ी ही बने रहे और बोले, "बहुत खूब, हा इस काम के लिए बीरबल ही सही व्यक्ति रहेंगे।" हज्जाम बाल कार्टो कर चला गया। बदशाह अकबर ने दिरबार में आते के साथ ही इस योजना की घोषणा दरबार में कर दी। इसके बाद बीरबल को देखते हुए कहा, बीरबल, अब तुम ही स्वर्ग जाओ और वहां से लौटकर हमें बताओ कि हमारे पुरखी को किस चीज की जरूरत है ।" बीरबल बोले. "हुजूर, आप के मन में यह बिचार कहां से आया?" बादशाह अकबर बोले,"यह विचार मेरे मन की उपज नहीं है। यह विचार तो हमारे हज्जाम के मन की उपज है। उसी ने हमें यह विचार सुझाया।" बीरबल ने बादशाह के कहने का मतलब अच्छी तरह से समझ लिया और मन-ही-मन ठान लिया कि उस हज्जाम को सबक सिखाना है। बीरबल ऐसा सोचते हुए बोले,

"जहांपनाह, आपने मुझे इस काबिल समझा, शुक्रिया। मैं स्वर्ग की यात्रा पर जाने के लिए तैयार हूं। हुजूर, लेकिन मुझे कुछ दिन का समय दीजिए ताकि मैं अपने परिजनों के लिए जरूरत की चीजों का प्रबंध कर सकू।" अकबर बादशाह ने बीरबल को कुछ दिनों का समय दे दिया और चिता भी तैयार करने का हक्म जारी कर दिया। बीरबल ने इस बीच चिता की जगह को जाकर देखा, फिर चिता के स्थान से अपने घर तक अंदर-ही-अंदर एक सुरंग खुदवानी आरंभ कर दी। बीरबल के चिता पर बैठने की तारीख आ गई। नगर के सारे लोग वहां आकर जमा हो गए। बीरबल सुरंग के द्वार से सटकर लेट गए और दरबारी कारिंदों ने उनके चारों तरफ लकड़ियां सजा दीं। देखते-ही-देखते चिता धू-धू करके जल उठी। बीरबल को चाहने वाले आंसू बहा रहे थे और ईष्ष्या करने वाले खुश हो रहे थे लेकिन चतुर बीरबल तो सुरंग से होते हुए अपने घर पहुंच गए थे। कुछ महीनों के बाद बीरवल दरबार में आए तो उनके हितेषी और शत्रु दोनों ही चकित रह गए कि एक मरा हुआ व्यक्ति पुनः जिंदा कैसे हो गया? वह बड़ी मुश्किल से पहचान में आ रहे थे। क्योंकि उनकी दाढी वेतरतीव बढ़ी हुई थी। बीरबल शहंशाह अकबर को सलाम करते हुए बोले, "मेरे मालिक! मैं सीधा स्वर्ग से यहां आ रहा हूं । आपके पुरखों की भी खबर लेकर आया हू।

बादशाह अकबर प्रसन्न होते हुए बोले, "बीरबल, तुम ठीक तो हो ? स्वर्ग में मेरे सब पुरखे कैसे हैं?" बीरबल बोले, जिहांपनाह, वहां किसी बात की कोई कमी नहीं है। चारों तरफ अमन-ही-अमन है। हां , वहां पर एक चीज की कमी है।" "बोलो बीरबल, हम वह चीज वहां भेजवाने की कोशिश करेंगे। " कहते -कहते खड़े हो गए। बीरबल बोले, "हुजूर, वहां कोई ढंग का हज्जाम ( नाई) नहीं है। आपके पुरखों ने कहा है कि कोई ढंग का हज्जाम फौरन यहां भेजा जाए। हुजूर, स्वर्ग में पहुंचने का रास्ता तो हम सबको मालूम हो ही गया है। वहां अब किसी को भी भेजना हमारे लिए कठिन नहीं रहा ।"

शहंशाह अकबर बोले, "हां, तुम्हारी बात तो सही है, पर वहां किस हज्जाम को भेजा जाए?" बीरबल अब कहां चूकने वाले थे वह झट से बोले, "हुजूर, इसमें भी कोई पूछने की बात है । आपका शाही हज्जाम वहां जाएगा। उससे बेहतर हजामत और कौन बना सकता है, हुजूर।" "ठीक है बीरबल, हम शाही हज्जाम को ही स्वर्ग भेज देते हैं।" फिर क्या था। बादशाह अकबर ने शाही हज्जाम को स्वर्ग जाने का हुक्म दे दिया। हज्जाम को षड्यंत्रकारियों का साथ देने का अच्छा फल मिला। वह बेमोत मारा गया।

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