Saturday, February 8, 2020

Akbar Birbal Short Stories for Kids

Short Stories for Kids : यह पोस्ट मे अकबर बीरबल के छोटे छोटे किस्से बताए गए है | जो बीरबल के बुद्धिमान होने का परिचय देते है |


Akbar birbal Short Stories
Short Stories for Kids



दीपक तले अँधेरा | Short Stories for kids

शाही महल की सबसे ऊंची छत्त पर बीरबल बादशाह अकबर के साथ बैठे गुफ्तगू कर रहे- थे। तभी उन्होंने सामने देखा, कुछ दूरी पर कुछ लोग एक. राहगीर को लूट रहे थे। राहगीर अपने सामान को बचाने की कोशिश में था लेकिन वह अकेला राहगीर इतने लोगों के आगे हार गया और उसका कोई वश न चला। राहगीर पिट भी गया और उसका सब माल-असबाब भी उससे छिन गया।

वह लहूलुहान राहगीर बादशाह सलामत के किले के नजदीक आया और चीख-चीखकर कहने लगा, "यह बड़ी शर्म और आश्चर्य की बात है, बादशाह के सामने ही लुटेरे मेरा सामान लूटकर भाग गए।" उसकी चीख-पुकार बादशाह के कान में पड़ी तो उन्हें भी बड़ा कष्ट हुआ और उन्होंने बीरबल को फटकारते हुए कहा, "क्या बीरबल, यह है तुम सबकी शासन व्यवस्था ? जब हमारी आंखों के सामने ही हमारी प्रजा लुट जाती है तब हमारी आंखों के पीछे यहां क्या नहीं होता होगा?" बीरबल ने बड़ी ही नम्रता से कहा,

"जहापनाह, क्या आपको यह कहावत नहीं मालूम कि दीपक दूसरों को रोशनी देता है, पर उसके तले अंधेरा ही रहता है?' शहशाह अकबर अवाक् रह गए। बीरवल के कहने का आशय था कि प्रशासन की नाक के तले ऐसा ही होता है, जब कर्मचारी घूसखोर होते हैं। बीरबल ने बातों-ही-बातों में बादशाह को यह समझा दिया था कि यह सब प्रशासन में ढील देने का नतीजा है।

बीरबल की परखी नजर | Akbar Birbal Hindi Story

एक  बार दरबारियों के साथ मिलकर अकबर बादशाह ने यह योजना बनाई कि देखें बीरबल को सच्चे दीन-दुखियों की पहचान है या नहीं। अत: बादशाह अकबर ने एक सैनिक को दीन-हीन की वेशभूषा में बीरबल के पास यह कहकर भेजा कि यदि वह बीरबल से कुछ धन लेकर आएगा तो इसके बदले में हम स्वयं उसको इनाम देंगे। बीरबल मंदिर से पूजा-अर्चना कर वापस आ रहे थे, तभी दीन-हीन के वेश में वह सैनिक आकर बीरबल के सामने खड़ा हो गया और कहने लगा,

"हुजूर, मेरा पूरा परिवार एक हफ्ते से भूखाहुजूर, आप मुझे दान करके अवश्य ही पुण्य कमाएंगे। आप तो महादानी हैं।" बीरबल ने उस दीन-हीन को ऊपर से नीचे तक देखा और अगले पल ही समझ गए कि यह ऊपर से जैसा है, अंदर से वैसा नहीं है। बीरबल ने उस पर कोई ध्यान नहीं दिया और आगे बढ़ गए। वह दीन-हीन भी उनके साथ चल पड़ा। बीरबल नदी के तट पर आकर खड़े हो गए, क्योंकि उनको नदी के उस पार जाना था। उन्होंने नदी पार करने के लिए जूती उतारकर हाथ में ली तो उस दीन-हीन ने भी अपनी फटी-पुरानी जूती उतारकर हाथ में ले ली। बीरबल ने जब नदी पार कर ली तब वह कंकरीले रास्ते से नंगे पांव ही आगे बढ़ गए।

लेकिन वह दीन-हीन कंकरीला रास्ता देखते ही खड़ा हो गया और झुक कर अपनी जूती पहन ली, फिर वह चलने लगा। कुछ दूर तक वह बीरबल के साथ चला फिर याचना भरी आवाज में वह बोला, "हुजूर, आप तो बादशाह अकबर के दीवान हैं। सुना है बड़े दानी हैं। दीन-हीन की पुकार लगता है आपने सुनी नहीं।" बीरबल बोले, "जो मुझे पापी बनाए, भला मैं उसको दान कैसे दे सकता हूँ?"

वह सैनिक चौंककर बोला, "कैसी बात कर रहे हैं, हुजूर? क्या मुझे दान देने से आप पापी हो जाएंगे?" "हां, मैं पापी हो जाऊंगा, शास्त्र कहते हैं कि शिशु का जन्म होने से पहले ही ईश्वर उसके भोजन की व्यवस्था मां के स्तनों में दूध देकर कर देता है। ईश्वर व्यक्ति को भूखा उठाता है पर भूखा सुलाता नहीं है, और तुम अपने आप को कई दिनों का भूखा बता रहे हो। इन सब बातों को देखने से तो यह लगता है कि ईश्वर तुमसे नाराज है। वह तुम्हें और तुम्हारे परिवार को भूखा ही रखना चाहता है।

मैं तो ईश्वर का सेवक हूं, उसकी मर्जी के खिलाफ मैं तुम्हें धन दे दूं तो वह मुझसे भी नाराज हो जाएगा। मैं ईश्वर के कार्यों में दखल नहीं दे सकता। माफ करना, मैं तुम्हारी कोई सहायता नहीं कर सकता, ऐसा तो कोई पापी ही कर सकेगा।" बीरबल के इतना कहने पर वह दीन-हीन अवाक् रह गया और चुपचाप वहां से चला गया। दरबार में आकर उसने सारी बातें बता दीं। दूसरे दिन शहंशाह दरबार में आए तो बीरबल से कहा, "बीरबल, तुम तो अपने आपको बहुत बड़ा दानी कहते हो। लोग भी तुम्हें धर्म-कर्म वाला मानते हैं। हम भी तुम्हें एक रहम दिल और दयालु प्रवृत्ति का इंसान मानते हैं।

हमें अफसोस है कि तुमने कल एक भूखे गरीब को खाली हाथ लौटा दिया। बीरबल, तुमने ऐसा क्यों किया?" "जहांपनाह!" बीरबल मुस्कराते हुए बोले, मैंने किसी गरीब को खाली हाथ नहीं लौटाया बल्िक एक छद्म वेशधारी को वापस लौटा दिया और मुझे इस बात की भी जानकारी है कि वह ढोंगी दीन-हीन कोई और नहीं आपका ही सैनिक था और मेरी परीक्षा लेने के लिए आपने ही उसे भेजा था।" बीरबल के इतना कहते ही वरबारियों के आश्चर्य का ठिकाना न रहा।

अकबर बावशाह चौंकते हुए बोले, "बीरबल, तुम्हें यह सब कैसे मालूम हुआ?" "हुजूर, उसके पांवों को देखकर। उसके पांव चिकने और कोमल थे। जब उसने कंकरीले रास्ते पर चलने के लिए जूती पहन ली तो मैं फौरन ही समझ गया कि यह कोई भूखा गरीब नहीं है। इसको तो नंगे पांव जमीन पर चलने की आदत ही नहीं है। जरूर बादशाह सलामत ने इसे यह देखने के लिए भेजा है कि बीरबल को सच्चे दीन हीन की पहचान है या नहीं।" बीरबल यह कहकर चुप हो गए। शहंशाह अकबर बीरबल को गर्व से देखते बोले, "मुझे तुम पर और तुम्हारी अक्लमंदी पर गर्व है, बीरबल। तुमको धोखा देना इतना सरल नहीं है।" सच और झूठ की पहचान करने के लिए बीरबल की तरह देखने और समझने की जरूरत है।


Hindi kahaniya
Akbar Birbal Hindi kahaniya


श्रेष्ठ हथियार वही, जो मौके पर काम आए | Akbar Birbal Stories

बादशाह अकबर ने दरबार में आते ही सवाल कर दिया, "सबसे श्रेष्ठ और उत्तम हथियार कौन-सा है?" एक दरबारी उठकर बोला, "जहापनाह, भाला.... भाला उत्तम हथियार है। दूसरा दरबारी बोला, "नहीं हुजूर, तलवार।" तीसरा दरबारी बोला, "नहीं जहांपनाह तीर कमान।" वादशाह को दरबारियों के जवाब से संतुष्टि नहीं मिली तो उन्होंने बीरबल की ओर देखा और कहा, "तुम्हारा क्या जवाब है, बीरवल?' बीरवल सोचते हुए वोले, "हुजूर, मेरे विचार से उत्तम हथियार वही है, जो समय पर काम आए और अपनी श्रेष्ठता सावित कर दे।'

बादशाह अकबर असंतुष्ट होते हुए बोले, "यह कोई जवाब नहीं हुआ बीरबल।" बीरबल बोले, "जहांपनाह, में अपनी बात को सिद्ध करके दिखा दूंगा। अगली सुबह बीरबल अकबर बादशाह के साथ सैर के लिए निकले। बीरबल ने अपनी बात सिद्ध करने के लिए पहले से ही योजना बना ली थी। घूमते-घूमते वे दोनों एक सड़क पर में आ गए। इतने में गली में अचानक एक क्रोधित हाथी तेज गति से आता हुआ दिखाई दिया। बीरबल घबराई हुई आवाज में बोले, "हुजूर! हाथी तो सनकी लगता है। देख नहीं रहे कैसे पैर पटकता हुआ आ रहा है।"

अकबर बादशाह भी घबरा गए, "हां, बीरबल! हम तो पगलाया हाथी भागता हुआ आ रहा है। हम तो इतनी तेज भाग भी नहीं सकते, बीरबल।' यह कहते-कहते बादशाह काफी घबरा गए। उन्होंने कमर से लटक रही म्यान पर हाथ रखा तो बीरबल बोले, "जहांपनाह, यह क्या कर रहे हैं। मदांघ हाथी का मुकाबला भला तलवार से कैसे हो सकता है?' बीरबल यह बोल ही रहे थे कि तभी बादशाह के पैर के पास एक कुत्ते का पिल्ला आ झट से पिल्ले को उठाया और आ रहे हाथी की सुंड़ की ओर फेंक दिया ।

कुत्ते का पिल्ला इतना डर गया कि बुरी तरह चिल्लाने लगा। हाथी घबराकर पीछे को तरफ हटता चला गया। अकबर और बीरबल को भागने का मौका मिल गया। वे भागते हुए एक गली में आ गए। बीरबल बादशाह अकबर को माथे का पसीना पोंछते हुए देखकर बोले, "अब क्या कहते हैं, हुजूर, मैंने कोई गलत तो नहीं कहा था कि जो मौके पर काम आए, वही श्रेष्ठ हथियार होता है ?" अकबर बादशाह बोले, "हां बीरबल, कुत्ते का पिल्ला हथियार की गिनती में थोड़़े ही आता है । लेकिन उसने ही एक हमारा बचाव उस मदांघ हाथी से किया। मौके पर वह न आता तो आज हम जिंदा न होते। तुम्हारा कहना सही था ! हाथी कि श्रेष्ठ हथियार वही है, जो मौके पर काम आए।" यह पटकता कहकर अकबर बादशाह ने बीरबल की बुद्धिमत्ता का लोहा मानते हुए उन्हें गले से लगा लिया।


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