Thursday, January 9, 2020

hindi kahaniyan for kids With Moral

Hindi kahaniyan for kids With Moral : इस पोस्ट में प्रेणना दायक कहानी लिखी गई है  जिससे बच्चो को प्रेणना मिलेगी |

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Hindi Motivational Stories 


मूर्तिकार और पत्थर | Hindi Kahaniya 

शहापुर गाव मे विजय खातु नाम का बहुत प्रसिद्ध मूर्तिकार रहता था | वह मूर्तिकार पत्थर को छेनी और हथोड़ी से काटकर मूर्ति का रूप देता था | मूर्तिकार पत्थर पर छेनी और हथोड़ी से जोर जोर से वार करता था जिसके कारण पत्थर को बहुत दर्द होता था | 

कुछ दिनों तक पत्थर मूर्तिकार का वार सहता रहा लेकिन एक दिन ऐसा आया जब पत्थर को दर्द बरदाश नहीं हुआ और उसने मूर्तिकार को धैर्य जवाब दिया | पत्थर ने मूर्तिकार से कहा बस करो अब रोज रोज मुझे कितना दर्द दोगे अब मुझ से ये दर्द सहा नहीं जाता छोड़ दो मुझे अकेले और चले जाओ तुम यहाँ से |

मूर्तिकार ने पत्थर को समझाते हुए कहा परेशान मत हो बस थोड़े दिन और सहना पड़ेगा | मे तुम्हे भगवान की मूर्ति का आकर दे रहा हूँ फिर लोग तुम्हे पूजेंगे और तुम्हारा समाज मे भी बड़ा नाम होगा | दूर दूर से लोग तुम्हारे दर्शन के लिए आयेंगे और दिन रात पुजारी तुम्हारी देखबाल मे लगे रहेंगे | यह सब बोलकर मूर्तिकार अपने औजार उठाने गया उतने मे पत्थर क्रोधित होकर जोर से चिलाया मुझे मेरी जिंदगी जीने दो मे जानता हूँ मुझे कैसे जीना चाहिए तुम कोन होते हो मुझे बताने वाले | चले जाओ यहासे मे अभी जरा भी तकलीफ सह नहीं सकता |


मूर्तिकार ने कहा मे समझ सकता हूँ तुम्हे दर्द हो रहा लेकिन आज तुम अपना आराम देखोगे तो कल को पछताओगे | आज थोडासा सह लोगे तो कल को आराम से जिंदगी जी सकते हो | मे तुम्हारे अन्दर के गुणों को जानता हूँ इसलिए कह रहा हूँ यहाँ पड़े पड़े सड जाओगे | फिर भी पत्थर ने मूर्तिकार की बात नहीं सुनी |

पत्थर अपनी बात पर अडा रहा और मूर्तिकार की बात से उसको कोई फरक नहीं पड़ा | मूर्तिकार ने वह पत्थर को वैसे ही पड़ने दिया वहापर और उसको दूसरा उसे भी अच्छा पत्थर मिल गया | दुसरे पत्थर ने दर्द सेह लिया और मूर्तिकार ने एकदम अच्छी सी मूर्ति बनाली उस पत्थर से जिसको लोग देखते ही रह गए |

उस मूर्ति को एक बड़े से मंदिर मे रखा गया था जहा लोग रोज सुबह शाम उसकी पूजा अर्चना करते थे और अच्छे से देखबाल करते थे | फिर एक दिन ऐसा आया की मूर्तिकार ने जो पत्थर को ऐसेही सड़ते हुए छोड़ा था वह पत्थर को मंदिर मे लाया गया और एक कोने मे नारियल फोड़ने के लिए रख दिया गया |

अब वह पत्थर मन ही मन मे बहुत पछता रहा था और किसी से कुछ कह भी नहीं पा रहा था | उसने अगर उसी वक्त थोडासा दर्द सहा लिया होता तो आज उसकी पूजा होती लोग दूर दूर से दर्शन लेने आते थे... सम्मान मिलता और बहुत कुछ होता | कुछ दिन की वह पीड़ा अब जीवन भर के कष्ट से बचा लेती |

Moral of Hindi Story:

इस कहानी से हमें यह सिख मिलती है की जिंदगी मे निर्णय हमेशा सोच समझकर लेना चाहिए कभी भी क्रोधित होकर निर्णय नहीं लेना चाहिए क्यों की गुस्से मे हम गलत निर्णय ले सकते है जिसका पछतावा हमे आगे जाकर हो सकता है | और ज़िंदगी मे कभी अच्छे दिन आएंगे तो कभी बुरे दिन हमे बुरे दिनों के दर्द का सामना करना आना चाहिए |



तीन साधू  | Hindi Kahaniya 


एक बार की बात है किसी गावं में एक दम्पति रहा करते थे | एक दिन औरत घर के बाहर निकलती है तो देखती है की घर के सामने सफ़ेद लम्बी दाढ़ी में तीन साधू-महात्माओं बैठे हैं  | वह उन्हें पहचान नहीं पाती है और उनके पास जाके उनसे कहती है मैं आप लोगों को  पहचान नहीं पाई  और आप लोग यहाँ क्यों बैठे हैं | तब साधुओं ने कहा हमें भोजन करना है तब वह औरत उन साधुओं भोजन के लिए आमंत्रित करती है तभी एक साधू ने पूछा क्या तुम्हारा पति घर में है तब औरत ने जवाब दिया नहीं वह अभी बाहर गए है कुछ देर में आ जायेंगे |तब तीनों साधू ने एक साथ कहा हम अंदर नहीं आ सकते |

कुछ देर बाद उसका पति आ जाता है तब वह औरत अपने पति को पूरी बात बताती है यह सुनकर उसका पति उन साधुओं को पुनः आमंत्रित करने के लिए कहता है |तब वह औरत वापस उन साधुओं  के पास जाती है और कहती है मेरे पति आ चुके है कृपया आप लोग घर में प्रवेश करिए और भोजन ग्रहण करिए |

तब उनमे से एक साधू ने कहा हम कभी भी किसी के घर में एक साथ प्रवेश नहीं करते हैं |तब औरत ने बड़ी अचरज से पूछा लेकिन ऐसा क्यों आप लोग एक साथ क्यों नहीं आ सकते हो | तब मध्य में खड़े साधू ने कहा पुत्री जो मेरी दायीं तरफ खड़े है उन साधू का नाम ‘धन’ और बायीं तरफ खड़े हैं उन साधू का नाम ‘सफलता’ है, और मेरा नाम ‘प्रेम’ है। अब तुम अंदर जाओ और अपने पति से विचार-विमर्श कर के बताओ की तुम हम तीनो में से किसको आमंत्रित करना चाहती हो।” 


तब औरत अंदर जाती है और अपने पति से पूरी बात बता देती है। उसका पति बहुत खुश हो जाता है । चलो जल्दी से ‘धन’ को आमंत्रित कर लेते हैं, अगर धन आ जायेगा तो हमारा घर धन दौलत से भर जायेगा  और फिर हमें कभी भी  पैसों की कमी नहीं होगी। तब उसकी औरत कहती है क्यों ना हम सफलता को आमंत्रित करे अगर एक बार सफलता आ गई तो हम जो भी काम करेंगे सब काम में सफल होंगे और धीरे धीरे धन भी आ जायेगा | पति ने कहा बात तो तुम ठीक कह रही हो लेकिन उसमे काफी मेहनत करनी पड़ेगी |मुझे लगता है हमें धन को बुला लेना चाहिए कुछ देर बहस के बाद दोनों  किसी निर्णय पर नहीं पहुच पाए, और अंतत: निर्णय किया कि  वह साधुओं से यह कहेंगे कि धन और सफलता में जो आना चाहे आ जाये। 

फिर औरत बाहर जाती है और उन्हें यही बात कह देती है  उसकी बाते सुनकर वह साधू एक दुसरे को देखने लगते है और फिर वह से जाने लगते है  तब औरत ने उन्हें रोकते हुए कहा आप लोग ऐसे वापस  क्यों जा रहे हैं | तब वह साधू लोग कहते हैं की पुत्री हम लोग ऐसे ही सभी के घर जाते है जो लोग लालची होते है वो लोग धन और सफलता को आमंत्रित करते है तब हम लोग वहां से चले जाते है और जो लोग प्रेम को आमंत्रित करते है उसके यहाँ बारी बारी से हम भी प्रवेश कर जाते है |

Moral of Story : जहाँ प्रेम होता है वहां  धन और सफलता अपने आप आ जाती है |


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