Wednesday, January 1, 2020

Panchtantra Ki Kahaniyan in Hindi For Kids

इस पोस्ट में Panchtantra Ki Kahaniyan hindi में दी गई है जिन्हें पढ़कर बच्चों को अच्छी सिख मिलेगी अगर यह कहानी आपको अच्छी लगे तो इसे अपने मित्र के साथ शेयर करें |




नन्ही चिड़िया | Panchtantra Ki Kahaniyan

रामपुर नाम के गाव के पास एक बहुत ही घना जंगल हुआ करता था | बहुत समय पुरानी बात है, उस जंगल मे बहुत सारे जानवर रहते थे | वह जंगल हरीयाली से भरा हुआ था | गर्मी का समय था और बहुत सारे पेड़ों की डालियां सुख गयी थी | किसी कारन से जंगल मे भीषण आग लग गयी थी |

सभी जानवर इस आग को देखकर डर रहे थे और जंगल मे इधर उधर भागने लगे | थोड़ी ही देर मे जंगल मे भगदड मचने लगी और सभी जानवर चिंतित थे की अब क्या होगा अपना | सभी जानवर इधर उधर भाग रहे थे और अपनी अपनी जान बचने मे लगे हुए थे | बंदर एक पेड़ के ऊपर से दुसरे पेड़ पर छलांग लगाकर बहार निकलने का रासता धुंड रहे थे और सभी जानवर उनका पिचा कर रहे थे |

AKBAR BIRBAL KI KAHANIYA


उस जंगल मे एक छोटीसी चिड़िया रहा करती थी | उसने देखा जंगल के सभी जानवर आग को देखकर परेशान हो रहे थे तभी उसने सोचा मुझे इनकी मदद करनी चाहिए | यही सोचकर वह जंगल के पास मे एक नदी थी वहा पर गयी और उसने सोचा मे इस नदी का पानी अपनी चोच मे भरकर ले के जाती हूँ और जंगल मे लगी आग पर डाल देती हूँ |

चिड़िया चोच मे पानी भर भर कर लाने लगी और जंगल मे लगी आग पर डालने लगी | तभी चिड़िया के पास से एक उल्लू गुजर रहा था उसने चिड़िया की इस हरकत को देखा और मन ही मन सोचने लगा ये चिड़िया तो कितनी मुर्ख है जंगल मे लगी इतनी भीषण आग उस के चोच मे भरकर पानी डालने से थोडीना बूजेगी | यह सोचकर वह चिड़िया के पास गया और चिड़िया को बोला तुम कितनी मुर्ख हो इस तरह चोच मे पानी भरकर लाने से आग नहीं बुजेगी |

चिड़िया ने बहुत विनम्रता से उल्लू को जवाब दिया | चिड़िया ने कहा मुझे पता है मेरे प्रयास से कुछ होगा नहीं लेकिन मे अपनी तरफ से अच्छा करना चाहती हूँ | अगर मेरी तरह सब सोचने लगेंगे तो शायद ये आग बुज सकती है | चिड़िया का यह जवाब सुनकर उल्लू बहुत ही प्रभावित हुआ और चिड़िया की वाह वाह करने लगा |

Moral Of Hindi Story:

इस कहानी से हमें यह सिख मिलती है की परेशानी आने पर डरे नहीं बिना घबराये प्रयास करते रहना चाहिए |



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Panchtantra Ki Kahaniyan


लालची कौवा | Panchtantra Ki Kahaniyan


  एक बार की बात है की कंचनपुर गावं में एक धनी व्यापारी रहा करता था | जिसके रसोई घर में एक कबूतर ने घोंसला बनाया हुआ था | एक दिन कौवा उड़ते उड़ते वहां आ जाता है और वह देखता है की रसोई घर में मछली बनी हुई है तो उसके मन में लालच आ जाती है | फिर वह सोचता है की अगर इस रसोई घर में घुस जाऊ तो रोजाना अच्छी चीजे खाने को मिल जाएँगी लेकिन इस रसोईघर में प्रवेश कैसे किया जाये |

कुछ देर सोचने के बाद उसे एक तरकीब सूझी और उसने सोचा की अगर मै इस कबूतर से दोस्ती कर लेता हु तो इस रसोई घर में आराम से प्रवेश कर जाऊँगा | यह सोचकर वह कबूतर के पास चला जाता है और वह कबूतर जहाँ दाना चुन रहा होता है वह भी उसके पीछे लग जाता है | कुछ देर बाद कबूतर ने देखा की कौवा उसके पीछे लगा है तो वह पूछता है की तुम मेरे पीछे क्यों लगे हो कौवे ने कहा तुम मुझे अच्छे लगते हो मै तुमसे दोस्ती करना चाहता हूँ | तब कबूतर ने कहा बात तो तुम ठीक कह रहे हो लेकिन हमारा तुम्हारा भोजन अलग अलग है  मै  दाने चुगता हु और तुम कीड़े खाते हो तो कौवा कहता है कोई बात नही हम साथ साथ रह लेंगे | फिर वह कबूतर का दोस्त बन जाता है |



शाम को दोनों साथ उस धनी व्यापारी के घर आते है तो व्यापारी देखता है की कबूतर के साथ में एक कौवा भी है तो व्यापारों सोचता है की यह कबूतर का मित्र होगा तो उसके लिए भी रसोई घर में एक घोंसला रख देता है |

एक दिन व्यापारी ने अपनी पत्नी से कहा की आज मेहमान आ रहे है तो आज कुछ स्वादिष्ट मछलियाँ बना दे यह सुनकर कौवे के मन में लालच आ जाता है | तो उसकी पत्नी ने भोजन बना दिए | कुछ देर बाद कबूतर ने कौवे से कहा चलो भोजन करने बाहर चलते है तो मक्कार कौवे ने कहा नहीं आज मै नहीं जाउगा मेरा पेट दर्द हो रहा है  तो फिर कबूतर चला जाता है | इधर कौवा इन्तजार कर रहा था कब उसकी पत्नी बाहर निकले तो वह मछलियाँ खाए कुछ देर बार उसकी पत्नी बाहर चली जाती है तो कौवा तुरंत मछली की ओर लपकता है और एक मछली का टुकड़ा उठा लेता है बाहर उसकी पत्नी को अन्दर से आवाज आती है तो वह रसोई में जेक देखती है तो कौवा मछली खा रहा होता है तो उसकी पत्नी तुरंत कौवे की गर्दन मरोड़ दी और उसका घोंसला भी बाहर फेक देती है | और कौवे को उसकी लालच का फल मिल जाता है |

Hindi Panchtantra Ki Kahaniyan For Kids


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