Monday, December 23, 2019

आलसी गधा | Story in Hindi for kids

आलसी गधा Story in Hindi for kids इस कहानी में एक आलसी गधे के बारे में बताया गया है जिससे बच्चो को एक सिख मिलेगी 

आलसी गधा | Story in Hindi for kids

एक रामपुर नाम के गाव में भोला नाम का एक आदमी रहता था उसके पास बोधु नाम का एक गधा था | भोला बहुत ही दयालु था और अपने नाम के प्रतिकूल उसका स्वाभाव था | लेकिन उसके पास जो गधा था वो बहुत ही आलसी था और काम नहीं करने के बहाने दूँढता था | भोला का नमक का व्यापर था वो नमक की बोरी को अपने घर से नदी के पार शहर में बेचने जाता था | भोला का यह व्यापर बहुत अच्छे से चल रहा था और आमदनी भी अच्छी खासी आ जाती थी जिससे उसका घर चलता था | लेकिन भोला के पास जो गधा था बोधु नाम का वो बहुत ही आलसी था और उसको ये नमक की बोरी अपने पीठ पर ले जाना अच्छा नहीं लगता था और वो अलग अलग बहाने दूँढता था ताकी उसको काम नहीं करना पड़े |

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भोला का यह व्यापर अच्छा चलता रहा और बोधु का आलसी पन बढ़ता गया | भोला रोज गधे की पीठ पर ६ बोरी रखता था और ग़ाव से शहर बेचने के लिए लेके जाता था | एक दिन नदी पार करते समय नदी के एक फिसलन भरे पत्थर पर गधे का पाँव पड गया और गधा पत्थर पे से फिसल कर गिर गया | भोला ने उसको किसी तरह से उठाया और नदी पार करके दूसरी ओर लेकर गया | जब भोला ने उसको नदी के बहार निकला तब गधे को वो बोरिया हलकी लगने लगी और मन ही मन सोचा की ये नदी में तो जादू है और इस जादू के कारन ही मेरे पीठ का बोज हल्का हुआ है | भोला ने जब गधे को नदी से बहार निकला तब सारा नमक नदी में घुल मिल गया था और बोरिया खाली हो गई थी तो उसने सोचा आज शहर जाके कुछ फायदा नहीं है और वापस अपने घर की ओर चलने लगा | गधे को तोह बस काम नहीं करने का बहाने चाहिए था और वो ख़ुशी ख़ुशी घर की ओर चलने लगा और मन में सोचा की आज तो पीठ का बोज भी हल्का हो गया और काम से छुटकारा भी मिल गया | व्यापारी निराश होकर  घर आया और गधे को खुट से बाँध दिया | गधा मजे से अपनी घास खा रहा था और बहुत खुश था काम से जल्दी घर आने पर |




आलसी गधा | Story in Hindi for kids

दुसरे दिन भोला ने फिर से ६ बोरी नमक गधे की पीठ पर रखा और शहर की ओर बढ़ने लगा | गधा बहुत आराम आराम से चल रहा था और जैसे ही नदी के पास आया फिर से नदी में कल वाली जगह पर जाके बैठ गया | भोला ने फिर से गधे को नदी के बहार निकला और बहुत परेशान  हो गया था क्युकी वह आज भी बाजार तक नहीं पहुच सका था और नमक की बोरी भी पानी में घुल मिल गयी थी |  और गधा तो आज भी खुश था क्योंकी उसके पीठ का बोज हल्का हो गया था और जल्दी घर पर जाने भी मिला | गधा मन ही मन में नदी का धन्यवाद कर रहा था और नदी जादुई है ये उसने मान लिया था | भोला बहुत परेशान था और नदी पार करके बोरिया कैसे लेके जाए शहर तक ये सोचने लगा | गधा रोज वही पर नदी में जाके बैठने लगा | एक दिन भोला ने देखा की गधा जान भूजकर वही पर बैठ रहा था तो भोला ने गधे को सबक सिखाने का सोचा | भोला ने नमक के बदले  8 बोरी कपास से भर दी और नदी के तरफ बढ़ने लगा | गधा रोज की तरह आज भी खुश था और नदी में जाकर बैठ गया | भोला ने ये सब देखा और जोर जोर से हसने लगा क्योंकी आज नमक की बोरी के बदले कपास भरा था | कपास पानी में भीगने के वजह से भारी हो गया और बोधु पानी के बहार निकल ही नहीं पा रहा था | फिर भोला ने हँसते हुआ कहा तुम क्या सोचे मुझे बेवकूफ बनाओगे अब तुम्हे बाजार जाकर फिर घर लौटना होगा वो भी यह 8 बोरी लेकर तब गधा पछताने लगा और समझ गया की नदी में कोई जादू नहीं  है फिर वह बाजार जाके घर लौटा उस दिन के बाद से प्रतिदिन भोला इस पार से उस पार बोरियां लेके जाता लेकिन गधे ने  कभी भी पानी में बैठने की हिम्मत नहीं की |

Story in Hindi for kids





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