Tuesday, December 24, 2019

Short Hindi stories with morals For Kids

दोस्तों इस पोस्ट में बच्चो को लिए  Short Hindi stories with morals दी गई है जो की बच्चो को काफी अच्छी सिख देगी |

चूहे और शेर की कहानी Short Hindi stories 



एक बार की बात है एक शेर अपनी गुफा में बहुत आराम से सो रहा था तभी अचानक से वहां पर एक चूहा आ गया |  वह शेर के ऊपर खुदने लगा तभी शेर की नींद खुल गई और वह दहाडने लगा | शेर गुस्सा हो चुका था शेर का यह रूप देखकर चूहा डर गया और वहां से भागने लगा लेकिन शेर ने उसे अपनी पंजो में जकड लिया और मरने के लिए सोचने लगा चूहा डर के कारण  बहुत तेज से कापने लगा | और कापते हुआ शेर से कहा हे जंगल के राजा मुझे माफ़ कर दीजिये मुझसे बहुत बड़ी भूल हो गई अगर आपने मुझे जाने दिया तो आपका बहुत उपकार होगा और मैं समय आने पर आपके इस उपकार का कर्ज चूका दूंगा | शेर मन ही मन हँसने लगा की भला ये छोटा सा चूहा मेरे किस काम आएगा लेकिन शेर को उस पर दया आ गई और शेर ने उसे छोड़ दिया |

ऐसें ही समय बितता गया हमेशा की तरह एक दिन शेर भोजन की तलाश  जंगल में घूम रहा था और भोजन की तलाश करते करते वह थक गया तभी शेर के किसी शिकारी ने देख लिया और वह शेर के ऊपर जाल फेक कर बड़ी चालाकी के साथ शेर को जाल में कैद कर लिया | जाल में फसते ही  शेर जोर जोर से दहाड़ मरने लगा और सहायता मागने लगा | उसकी दहाड़ने की आवाज सुन कर चूहा वहां पर पहुच जाता है और वह देखता  है की शेर जाल में फसा हुआ है तब वह अपनी नकुली दातों से  तेजी से वह जाल काटने लगता और कुछ ही देर में उसने पूरी जाल काट दी और शेर जाल से मुक्त हो गया | जाल से आजाद होने पर शेर ने चूहे को धन्यवाद कहा |

उस दिन शेर को समझ में आया की कोई भी प्राणी को उसकी शरीर  देखकर उसकी ताकत का अंदाजा नहीं लगाना चाहिए |

Moral of Hindi Stories :-  

इस कहानी से हमें यह सिख मिलती है की हमें किसी को भी कभी छोटा नहीं समझाना चाहिए | कोई भी व्यक्ति कभी भी काम आ सकता है और हमें एक दुसरे की मदत करनी चाहिए क्युकी अगर आप दुसरे की मदत करेंगे तो लोग आपकी मदत करेंगे |


यह भी पढ़े :




 खरगोश और कछुआ की कहानी Short Hindi stories




एक दिन जंगल मे खरगोश और कछुआ पेड़ के नीचे बैठकर आराम कर रहे थे | खरगोश अपनी तेज चाल को लेकर घमंडी था और जंगल के सभी जानवरों से उसके साथ दौड़ लगाने को चुनौती करता था | एक दिन उसने कछुए की मजाक उड़ाई और उसको कहा तू कितना धीमा चलता है | कछुए को यह बात खरगोश की अच्छी नहीं लगी और उसने कहा चलो दौड़ लगाकर देखते है कोन ज्यादा तेज है |

खरगोश और कछुए की दौड़ देखने जंगल के सारे जानवर आगए और उनकी दौड़ शुरू हुई | खरगोश दौड़ शुरू होते ही तेज भागने लगा और कछुए से इतना आगे निकल गया था की खरगोश को कछुआ दिखाई ही नहीं दे रहा था | दूसरी ओर कछुआ अपनी धीमी गति से आगे बड रहा था | कछुए को खरगोश उससे आगे निकल जाने की चिंता नहीं थी वो आरामसे इधर उधर देखकर दौड़ का आनंद उठाते हुए भाग रहा था | खरगोश ने आधे से ज्यादा रास्ता दौड़ का खतम कर लिया था तब उसने पीछे मुड कर देखा के कछुआ कहा है तोह उसे कछुआ दिखाई नहीं दे रहा था | खरगोश ने सोचा मे तो कछुए से काफी ज्यादा आगे निकल चूका हु और मेरे यहाँ तक पहुचने को बहुत समय लगेगा कछुए को इसलिए खरगोश ने सोचा की मे इतना आगे पहुच गया हूँ  तो मे थोडा आराम कर लेता हूँ |

खरगोश को रेस ट्रैक के बाजु मे गाजर का खेत दिखा और उसने सोचा कछुआ आने तक मे एक पेड़ के निचे गाजर खाते हुए थोडा आराम कर लेता हूँ | कछुआ धीमी गति से आगे बढ़ रहा था और खरगोश आराम से बैठकर गाजर खा रहा था | पेट भरकर गाजर खाने के बाद खरगोश ने एक बार मुड कर देखा की यदि अभी तक कछुआ आया है या नहीं तो तब भी कछुआ आया नहीं था | तो खरगोश ने सोचा मेरेपास तो बहुत समय है और ये दौड़ तो मे आराम से जीत जाऊंगा | खरगोश थोडा थका हुआ था और उसने सोचा मे थोडा आराम कर लेता हूँ और उसने अपनी आँखे बंद कर ली | आँखे बंद करने पर खरगोश को अच्छे से नींद आगई और वह घेरे सपने मे पहुच गया | उतने मे कछुए ने खरगोश से ज्यादा रासता समाप्त कर लिया था | तभी अचानक से खरगोश की नींद खुलती है और खरगोश डरकर उठ जाता है | उठते साथ ही देखता है की कछुआ रेस ट्रैक के अंतिम तक पहुचने वाला रेहता है | फिर खरगोश बहुत तेज दौड़ने लगता है पर तब तलक कछुआ फिनिश लाइन पार कर लेता है |
खरगोश को बहुत अफसोस होता है और वह कछुए को खुदसे तेज मानने लगता है |

जंगल के सभी जानवर कछुए को बधाईया देने लगे और खरगोश की हार पर हसने लगे | खरगोश अपनी दौड़ मे तेज था पर घमंड के कारन हार गया दूसरी ओर कछुआ अपनी दौड़ मे धीमा था लेकिन वह घमंडी नहीं था |

Moral of Hindi Story :

कभी भी घमंड मे आकर कोई काम नहीं करना चाहिए | जिंदगी मे धीमी और लगातार आई हुई सफलता ही इंसान को उचे स्थान पर ले जाती है |

यह भी पढ़े :

जादुई चक्की | Hindi Kahaniya With Moral




No comments:

Post a Comment