Monday, December 30, 2019

Hindi Short stories for kids With Moral

इस पोस्ट में दो Short stories for kids दी गई है जिन्हें पढ़कर बच्चों को अच्छी सिख मिलेगी अगर यह कहानी आपको अच्छी लगे तो इसे अपने मित्र के साथ शेयर करें |

Short stories for kids
Short stories for kids


सच्ची मित्रता | Short stories for kids

एक बार की बात है एक जंगल में तीन मित्र हिरण, कछुआ और कठफोड़वा रहा करते थे | वह प्रतिदिन जंगल में घूमा करते थे एक दिन एक शिकारी ने उनके पैरों के निशान देखे तो उसको शिकार करने को मन हुआ | वह अपने घर जाता है और एक जाल लेके आता है और जहाँ उनके पैरों के  निशान थे वह जाल बिछा देता है फिर अपनी झोपडी में चला जाता है |

अगले दिन फिर वहां पर जब हिरन आता है तो वह उस जाल में फस जाता है तो वह  तेजी से मदत के लिए अपने दोस्त कछुआ और कठफोड़वा को पुकारने लगता है और चीखने लगता है बचाओ बचाओ उसकी आवाज सुनकर कछुआ और कठफोड़वा वहां पहुच जाते है तब कठफोड़वा कछुआ से कहता है तुम्हारे दात मजबूत है तुम इस जाल को काटो मै उस शिकारी को यहाँ आने से रोकता हूँ |


कछुआ जाल काटना शुरू कर देता है और कठफोड़वा  शिकारी के निगरानी के लिए उसके झोपडी के तरफ चला जाता है शिकारी हिरण की आवाज सुनता है और समझ जाता है की हिरण जाल में फस गया है फिर वह जैसे ही अपनी झोपडी से बाहर निकलता है तो कठफोड़वा उसके सिर पर चोच मारना शुरू कर देता है शिकारी वापस से झोपडी में घुस के पीछे रास्ते से निकल जाता है |

लेकिन कठफोड़वा उससे पहले वहां पहुच जाता है और तब तक कछुआ अपना काम कर चूका होता है कठफोड़वा उनसे कहता है जल्दी यहाँ से भागो शिकारी कभी भी आ सकता है | यह बोल कर तीनो मित्र वहां से भागने लगते है हिरण और कठफोड़वा तेज रफ़्तार के कारण वहां से भागने में सफल हो जाते है किन्तु धीमी चाल के कारण कछुआ शिकारी के हाथ लग जाता है और शिकारी उसे थैले में रखकर जाने लगता है और कहता है आज इसकी वजह से मेरा शिकार निकल गया अब इसको ही मार के खाऊंगा |


उधर हिरण सोचता है जिस मित्र ने मेरी जान बचाई अब वह फसा हुआ है अब मेरा भी फ़र्ज़ बनता है की उसे बचाया जाये | हिरण शिकारी के रास्ते में आ जाता है  हिरण को देखकर शिकारी थैले को फेक कर हिरन के पीछे भागने लगता है और हिरण भागते भागते अपने पुराने गुफा की तरफ पहुच जाता है और सोचता है की एक बार यह शिकारी इस गुफे में घुस गया तो इसका निकलना मुश्किल हो जायेगा |

तब हिरण उस गुफे में घुस जाता है फिर वह शिकारी भी वहां पहुच जाता है और सोचता है की अब यह हिरन कहा भागेगा और उस गुफे में घुस जाता है | गुफे के अंदर भुल भुलैया वाला रास्ता रहता है और शिकारी उन रास्तों में फस जाता है | इधर हिरण  गुफे के पीछे के रास्ते से निकल जाता है और उस थैले के पास पहुच जाता है फिर उस कछुए को आजाद कर देता है और तीनो  मित्र सही सलामत निकल जाते हैं |

Moral of Hindi Story :

हमें इस कहानी से यह सिख मिलती है की हमें अपने मित्रो का साथ देना चाहिए और सच्चा मित्र वही होता है जो मुसीबत में काम आये |


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पक्के दोस्त | Short stories for kids

एक रामपुर नाम के जंगल मे शेर और चूहा रहा करते थे | शेर और चूहा दोनों की दोस्ती बहुत ही अच्छी थी | वह आपस मे मिल जुल कर रहते थे | उन दोनों का घर आस पास मे ही था | वह आपस मे शिकार बाटकर खाते थे |
एक दिन शेर ने हिरन का शिकार करके लाया था और उसने चूहे को अपने ही घर से आवाज देकर हिरन का भोजन करने के लिए बुलाया | बहार से आवाज आई तुम्हे जो खाना है खाओ मुझे इससे ज्यादा जरुरी मेरा काम है | यह बात सुनकर शेर को बुरा लगा और थोडा गुस्सा भी आया |

दुसरे दिन चूहे को रास्ते मे एक शहद का डब्बा पड़ा हुआ मिला | चूहा बड़ा खुश हुआ और अपने घर उस डब्बे को लेकर गया जब चूहा खाने के लिए बैठा तब उसने शेर को आवाज लगायी और बोला भाई आजाओ मेरे घर खाने के लिए आज मे शहद लाया हूँ | उतने मे बहार से आवाज आई मुझे नहीं खाना तुम ही खाओ अपना खाना | 
चूहे को यह बात सुनकर थोडा बुरा लगा और उसको लगा की शेर भैया को शहद नहीं पसंद इसलिए उन्होंने ऐसा कहा होगा |


दो दिन बाद दोनों जंगल की तरफ निकले और रास्ते मे दोनों की मुलाकात हो गई | वह दोनों की दोस्ती इतनी गहरी थी की वह उस दिन की खाने वाली बात को भूल गए और आराम से खेलने कूदने लगे | खेलकर होने के बाद वह दोनों एक पेड़ के निचे जाकर बैठ गए और बाते करने लगे | बातो बातो मे उन्होंने उस दिन वाली बात छेडी और तब उन्हें पता चला की जब शेर ने चूहे को आवाज लगाई थी तब उसने शेर की आवाज सुनी ही नहीं थी  और ना ही चूहे ने कोई रुखा जवाब दिया था | फिर चूहे ने कहा मैंने भी एक दिन तुम्हे बुलाया था खाने के लिए तभी मुझे भी जवाब बराबर नहीं आया था तब शेर ने कहा मैंने भी तुम्हारी आवाज नहीं सुनी थी ना ही कोई ख़राब सा जवाब दिया था | तब दोनों ने साथ मे एक ही आवाज मे कहा "जरुर कुछ गड़बड़ है" |

तभी शेर ने चूहे  से कहा हमे पता लगाना होगा की कोन अपन दोनों की दोस्ती तोडने की कोशिश कर रहा है | हमे पता लगाना होगा ऐसा कोन है जो अपन दोनों को परेशान करना चाहता है यह चूहे ने शेर से कहा | 
उनकी बाते कोई छिपकर सुन रहा था तभी किसी के छिपकर भागने की आवाज सुनाई पड़ी इन दोनों को | 
दोनों ने जब उसका पिछा किया तब पता चला की यह तो लोमड़ी थी जो भाग रही थी | शेर ने दहाड़कर कहा रुकजा लोमड़ी वरना मुझसे बुरा कोई नहीं होगा | ऐसा कहकर शेर ने लोमड़ी को लपक कर पकड़ लिया |
लोमड़ी बहुत डरी हुई थी |


तब शेर ने चूहे से कहा आज रातका भोजन बहुत ही स्वादिष्ट होने वाला है आज मै भोजन मे लोमड़ी पकाने वाला हूँ क्या तुम आओगे खाने | तभी चूहे ने कहा जरुर आऊंगा शेर भाई आज तो खाने मे मज्जा आजएगा ऐसा भोजन मे नहीं छोड़ सकता | घबराई हुई लोमड़ी दोनों से माफ़ी मांगने लगी | 

तभी शेर ने लोमड़ी को 100 उठक बैठक करने का और एक हजार बार " मै अभी किसी को तंग नहीं करुँगी " यह बोलने का दंड दिया | लोमड़ी बिचारी और भी क्या करती अपने गलती की सजा तो उसको मिलनी ही थी | लोमड़ी दो घंटे तक वह वाक्य बोलने लगी और उठक बैठक भी करने लगी | इससे शेर और चूहे की दोस्ती और भी पक्की हो गई और दोनों हमेशा साथ मे रहने लगे |

Moral of Hindi Story:

हमे इस कहानी से यह सिख मिलती है की अच्छे दोस्त किसी तीसरे के कहने पर अपनी दोस्ती को खतम नहीं करती है और एक दुसरे पर विश्वास रखकर चलते है | 

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