Tuesday, December 31, 2019

Hindi Panchtantra Ki Kahaniyan For Kids

इस पोस्ट में Panchtantra Ki Kahaniyan दी गई है जिन्हें पढ़कर बच्चों को अच्छी सिख मिलेगी अगर यह कहानी आपको अच्छी लगे तो इसे अपने मित्र के साथ शेयर करें |


Panchtantra Ki Kahaniyan
Hindi Kahaniya 

अनोखी तरकीब | Panchtantra Ki Kahaniyan


एक बार की बात है किसी एक गावं में एक बहुत अमीर व्यापारी रहता था उसके घर पर बहुत सारे नौकर और काम करने वाले लोग लगे हुए थे | एक दिन उस व्यापारी के घर में किसी ने चोरी कर ली लेकिन बहुत तलाश करने पर भी चोरी किया हुआ सामान ना मिला | तो व्यापारी ने सोचा की वह नया ले लेगा परन्तु उसकी पत्नी जिद पर आ गई की उसे वही चाहिए क्युकी चोरी हुई चीज़ कुछ और नहीं बल्कि उसकी पत्नी का गले का हार था | कई बार मनाने पर उसकी पत्नी ना मानी और जिद लगाई रखी उसे उसका वही हार चाहिए |

तब वह व्यापारी शहर चला जाता है और पूरी चोरी की बात एक काजी को बता देता है फिर वह काजी उस अमीर व्यापारी के घर आता है | और सभी नौकर और काम करने वालो को घर की आँगन में बुलाता है और सबको एक एक छड़ी दे देता है | वह सब छड़ी एक बराबर की होती है न कोई बड़ी न कोई छोटी और कहता है की सब यह छड़ी अपने घर लेकर जाओ और कल सुबह सब अपनी छड़ी लेकर आना |इस छड़ी की यह खासियत है की यह चोर के पास जाकर अपने आप एक ऊँगली के बराबर बाद जाएगी और जो चोर नहीं होगा उसकी छड़ी वैसे की वैसी ही रहेगी और काजी की बात सुनकर सब उस छड़ी को लेकर अपने अपने घर चले जाते हैं |


सब अपने घर पहुचने पर सो जाते हैं परन्तु जो चोर रहता है वह सोचने लगता है की कल अगर काजी के सामने मेरी छड़ी एक ऊँगली बड़ी निकली तो मुझे तुरंत सब पकड़ लेंगे और इससे बचने के लिए वह तरकीब सोचने लगा कुछ देर सोचने के बाद उसने सोचा की वह उस छड़ी को एक ऊँगली काट देगा तो कल एक ऊँगली बढ़ने पर वह छड़ी सबके बराबर हो जाएगी और उसे कोई नहीं पकड़ पायेगा | फिर वह ऐसा ही करता है और उस छड़ी को एक उंगली के बराबर काट देता है फिर उसे इस तरह घिस देता है की ताकि किसी को पता न चले की वह छड़ी काटी गई है ऐसा करने के बाद वह खुसी खुसी सो जाता है की अब वह नहीं पकड़ा जायेगा |

अगले दिन सुबह वह खुसी खुसी उस व्यापारी के घर पहुचता है वहां बहुत लोग पहले से ही जमा थे | काजी ने सभी नौकरों को एक साथ खड़ा कर दिया और एक एक करके सबकी छड़ी देखने लगा लेकिन जब उस चोर की बारी आई तो उसने देखा की उसकी छड़ी एक ऊँगली छोटी है उसने तुरंत उस चोर को पकड़ लिया और कहा इस छड़ी में ऐसी कोई जादू नहीं थी की यह बड़ी हो जाएगी बस मैंने चोर को पकड़ने के लिए ऐसी तरकीब बनाई थी और तुम इस जाल में फस गए और तुमने इस छड़ी को काट दिया जिससे तुमने सोचा की तुम बच जाओगे और फिर इसके बाद उस व्यापारी ने उससे अपने पत्नी के हार ले लिए और उसे जेल में डाल दिया गया |

फिर वह धनी व्यापारी उस काजी की तरकीब से बड़ा प्रसन्न हुआ और खुश होकर उस काजी को इनाम भी दिया|




        ++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++++


एक से भले दो | Panchtantra Ki Kahaniyan


जबलपुर नाम के गाव मे एक केशव नाम का ब्राहमण रहता था | एक दिन ब्राहमण को घर की पूजा करने के लिए पास के एक गाव मे बुलाया गया था | उस  गाव मे जाने का रास्ता जंगल से था |  ब्राहमण ने जब अपनी माँ से कहा की मे जा रहा हूँ पूजा करने के लिए तो उसकी माँ ने कहा किसी को साथ मे लेकर जाना क्यों की उस गाव मे जाने का रासता जंगल से हो कर जाता है | ब्राहमण ने अपने एक मित्र से पुछा साथमे चलने के लिए तो उसने कहा मे तो अभी बहार जा रहा हूँ मे तो नहीं आ सकता तुम्हारे साथ | ब्राहमण ने अपनी माँ से कहा कोई साथमे आने के लिए है नहीं तुम डरो मत मे अकेला ही चला जाऊंगा | माँ ने कहा रुक जा और वह पास मे एक नदी के किनारे गई और वहा से केकड़ा पकड़कर लाई | जब ब्राहमण ने उस केकड़े को देखा वो हसने लगा और बोला माँ ये तो केकड़ा है ये क्या मेरी मदद करेगा | तब ब्राहमण की माँ ने कहा कोई नहीं से अच्छा इसे लेकर जाओ अपने साथ | तब ब्राहमण ने कहा ठीक है लेकर जाता हूँ और उस केकड़े को कपूर की गोल डिब्बी मे रख दिया |


डिब्बी कपूर की थी और उस ब्राहमण ने उस डिब्बी को अपने झोले मे डाल दिया और जंगल की ओर बढ़ने लगा | ब्राहमण घर से खाना खाकर निकला था | दुपहर का समय था और धुप ब्राहमण के सर पर थी | थोडी दूर तक चलने के बाद ब्राहमण थक गया और उसे एक बड़ा सा बरगद का पेड़ दिखा और ब्राहमण ने सोचा मे इसके निचे ही थोडा सा आराम कर लेता हूँ तब तलक धुप भी थोड़ी कम होजाएगी और मे आराम से उठकर चले जाऊंगा | घर से खाना खाकर आने की वजह से ब्राहमण को तुरंत आँख लग गई और ब्राहमण गहरी नींद मे सो गया | जिस पेड़ के निचे ब्राहमण सोया था उस पेड़ के ऊपर साप का घर भी था |

साप ने अपने घर के कोटर से बहार देखा तब उसको ब्राहमण सोते हुए नजर आया | साप ने अपनी जिब चटकारते हुए बहार निकली और धीरे धीरे पेड़ की डालियों से निचे उतरने लगा | ब्राहमण तो एकदम गहरी नींद मे था और अपने झोले के ऊपर सर रखकर सो रहा था | जब साप निचे उतरा और ब्राहमण के पास आया उसको कपूर के डिब्बे की सुगंध आई | उसने ब्राहमण को डसने के बदले उस कपूर के डिब्बे के पास चले गया | कपूर का डिब्बा झोले मेसे बहार गिरने के कारण थोडा ढीला हो गया था | साप ने जब डिब्बी को खाने के लिए झपटा मारा तब डिब्बी टूट गयी और उस डिब्बी मे से केकड़ा बहार आगया और डिब्बी साप के दातो मे फस गई | तभी केकड़े ने मौका पाकर साप को गर्दन से पकड़ लिया और अपने तेज नाखूनों से कस लिया |

     जादुई कंघी | Hindi Kahani With Moral For Kids

केकड़े के नाख़ून लग जाने के वजह से साप वही पर ढेर होगया | तभी अचानक से ब्राहमण की आँख खुली और घबराते हुए ब्राहमण उठ गया | ब्राहमण ने देखा की उसके बाजु मे एक साप मरा पड़ा है और उस साप के मुह मे कपूर की डिब्बी फसी हुई है | ब्राहमण चौक गया और साप के दातो मे कपूर की डिब्बी फसी हुई देखकर समझ गया जरुर ये साप को उस केकड़े ने मारा होगा | ब्राहमण बहुत खुश हो गया और मन ही मन मे अपनी माँ का धन्यवाद करने लगा | ब्राहमण उठकर दूसरी गाव की तरफ चलने लगा और मन मे सोचने लगा माँ की आज्ञा मान लेने के कारण आज मेरे प्राणों की रक्षा हो गई |

Moral of Hindi Story:

इस कहानी से हमे यह सिख मिलती है की हमे हमेशा अपने बड़े माता, पिता और गुरु की आज्ञा का पालन करना चाहिए |



No comments:

Post a Comment